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UP Election 2027: यूपी में जनगणना की स्पीड बढ़ी, इससे चुनाव और सीटों के समीकरण पर क्या पड़ सकता है असर?

Census in UP: यूपी में जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनावी कैलेंडर के बीच सरकार और आयोग मंथन में जुटे हैं। जानिए जनगणना का विधानसभा चुनाव और सीटों के समीकरण पर क्या असर पड़ सकता है।
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लखनऊ

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Dimple Yadav

Jul 31, 2026

UP Census 2026 Uttar Pradesh Census UP Election 2027

यूपी में जनगणना को लेकर मंथन (photo- freepik)

UP Census 2026:उत्तर प्रदेश में करीब डेढ़ दशक बाद होने जा रही जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार मामला सिर्फ आबादी की गिनती तक सीमित नहीं है, क्योंकि जनगणना का दूसरा चरण ऐसे समय प्रस्तावित है, जब अगले साल उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रशासनिक तैयारियों के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी इस बात पर चर्चा तेज है कि जनगणना और चुनावी कार्यक्रम के बीच तालमेल कैसे बनाया जाएगा।

जनगणना और चुनावी कैलेंडर आमने-सामने

देश में जनगणना दो चरणों में कराई जानी है। पहला चरण, जिसमें मकानों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा सर्वे शामिल था, जून तक पूरा किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में लोगों की गिनती होगी। इस बार पहली बार जातीय गणना को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर की विधानसभा का कार्यकाल अगले साल मार्च से मई के बीच समाप्त हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि इन राज्यों में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 के दौरान कराए जा सकते हैं।

क्या चुनाव से पहले होगी जनगणना?

चुनाव आयोग पहले ही साफ कर चुका है कि चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया है और तय समय पर ही होंगे। वहीं जनगणना भी कानूनी प्रक्रिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों बड़े काम एक साथ कैसे पूरे होंगे। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए करीब साढ़े पांच लाख कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है, जिनमें बड़ी संख्या शिक्षकों की होती है। चुनावी ड्यूटी, बोर्ड परीक्षाएं और पंचायत चुनाव जैसी जिम्मेदारियों के बीच जनगणना के लिए समय निकालना आसान नहीं होगा।

नवंबर-दिसंबर का विकल्प क्यों माना जा रहा है?

प्रशासनिक स्तर पर इस बात पर मंथन चल रहा है कि यदि चुनाव से पहले पर्याप्त समय मिल जाए तो जनगणना का दूसरा चरण नवंबर या दिसंबर में पूरा कराया जा सकता है। ऐसा होने पर प्रशिक्षण, डेटा संग्रह और अन्य औपचारिकताएं भी समय रहते पूरी हो सकेंगी। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।

सीटों के समीकरण पर क्या असर पड़ सकता है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जातीय गणना के आंकड़े भविष्य की नीतियों और राजनीतिक रणनीतियों के लिहाज से अहम साबित हो सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आगामी विधानसभा चुनाव मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही होंगे। नई जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल भविष्य में परिसीमन (Delimitation), संसाधनों के वितरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

पांच राज्यों में एक साथ चुनाव की संभावना

उत्तर प्रदेश के अलावा गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड का विधानसभा कार्यकाल भी अगले वर्ष समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग आमतौर पर इन राज्यों में एक साथ चुनाव कराने की रणनीति अपनाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि यूपी में भी चुनाव फरवरी-मार्च के दौरान कराए जा सकते हैं। हालांकि अंतिम कार्यक्रम की घोषणा चुनाव आयोग ही करेगा।

अभी क्या है स्थिति?

फिलहाल सरकार और प्रशासन जनगणना की तैयारियों पर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर चुनावी संभावनाओं को देखते हुए दोनों प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाने पर विचार जारी है। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि जनगणना पहले कराई जाएगी या चुनावी कार्यक्रम के अनुसार इसकी तारीखों में बदलाव किया जाएगा। फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।

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