वैशाख/बुद्ध पूर्णिमा : दरिद्रता सहित अकाल मृत्यु का भय भी होता है दूर

07 मई 2020 का व्रत मुहूर्त, जानिये व्रत विधि, धार्मिक कर्म और महत्व...

By: दीपेश तिवारी

Published: 19 Apr 2020, 02:05 PM IST

सनातन धर्म में वैशाख पूर्णिमा का बड़ा ही महत्व है। इसी दिन को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध को समर्पित सबसे बड़ा पर्व है। दुनियाभर में बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह एक बेहद पवित्र दिन होता है। इस वर्ष यह पर्व 7 मई 2020 को पड़ रहा है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा पड़ती है, इसीलिए इसे वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध जयंती, वेसाक और हनमतसूरी आदि नामों से भी जाना जाता है। मान्यता अनुसार यह दिन भगवान विष्णु के नवें अवतार महात्मा बुद्ध यानी सिद्धार्थ गौतम जिन्हें हम गौतम बुद्ध के नाम से भी जानते हैं, उनके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

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वैशाख पूर्णिमा :
इस दिन दान-पुण्य और धर्म-कर्म के अनेक कार्य किये जाते हैं। इसे सत्य विनायक पूर्णिमा भी कहा जाता है। वैशाख पूर्णिमा पर ही भगवान विष्णु का तेइसवां अवतार महात्मा बुद्ध के रूप में हुआ था, इसलिए बौद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं।

वैशाख पूर्णिमा व्रत मुहूर्त...
मई 6, 2020 को 19:46:37 से पूर्णिमा आरम्भ
मई 7, 2020 को 16:16:48 पर पूर्णिमा समाप्त

बुद्ध पूर्णिमा:
जैसा सभी जानते है कि भगवान गौतम बुद्ध अपने अहिंसा, मानवतावादी और विज्ञानवादी विचारों से विश्व के सबसे महान पुरुष कहलाए, जिन्होंने धरती पर बौद्ध धर्म स्थापित कर उसका प्रचार-प्रसार भी किया। इसके चलते ही आज पूरे विश्व में करीब 180 करोड़ से भी ज्यादा लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं।

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केवल भारत में ही नहीं बल्कि चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे कई बड़े देशों में बुद्ध पूर्णिमा बड़े उत्सव के साथ मनाई जाती है। बौद्ध धर्म के साथ-साथ हिन्दू धर्म में भी बुद्ध पूर्णिमा का बड़ा महत्व है। क्योंकि हिन्दू धार्मिक में भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का ही एक अवतार कहा गया है।

वैशाख पूर्णिमा व्रत और धार्मिक कर्म
वैशाख पूर्णिमा पर व्रत और पुण्य कर्म करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि अन्य पूर्णिमा व्रत के सामान ही है लेकिन इस दिन किये जाने वाले कुछ धार्मिक कर्मकांड इस प्रकार हैं-

: वैशाख पूर्णिमा के दिन प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, जलाशय, कुआं या बावड़ी में स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।
: स्नान के पश्चात व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
: इस दिन धर्मराज के निमित्त जल से भरा कलश और पकवान देने से गोदान के समान फल मिलता है।

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: 5 या 7 जरुरतमंद व्यक्तियों और ब्राह्मणों को शक्कर के साथ तिल देने से पापों का क्षय होता है।
: इस दिन तिल के तेल के दीपक जलाएं और तिलों का तर्पण विशेष रूप से करें।
: इस दिन व्रत के दौरान एक समय भोजन करें।

गौतम बुद्ध की पूर्ण मोक्ष प्राप्ति की परिभाषा...
- भगवान गौतम बुद्ध द्वारा बौद्ध धर्म की स्थापना की गयी और उन्होंने 4 प्रमुख संदेश दिए हैं, जिन्हे इस बुद्ध पूर्णिमा हर जन मानस को पालन करना चाहिए।
- इस दुनिया में हर स्थिति में केवल दुःख है। जन्म में, बुढ़ापे में, बीमारी में, मृत्यु में, सब में दुःख है।
और इस दुःख के मुख्य कारण मनुष्य की इच्छा और तृष्णा ही है।
- मानव की इसी इच्छा और तृष्णा का अंत होने पर ही जीवन के समस्त दुःख समाप्त हो जाएंगे।
- कोई भी मनुष्य इन सभी इच्छाओं का अंत बौद्ध धर्म में दिये गये जीवन के 8 मार्गों से कर सकता है।
- भगवान बुद्ध के द्वारा सुझाए गए जीवन के वो आठ मार्ग हैं - सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाक, सम्यक कर्म, सही जीविका, सम्यक प्रयास, सत्य स्मृति और सम्यक समाधि।

वैशाख पूर्णिमा का महत्व
वैशाख पूर्णिमा पर धर्मराज की पूजा करने का विधान है, इसलिए इस व्रत के प्रभाव से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के बचपन के साथी सुदामा जब द्वारिका उनके पास मिलने पहुंचे थे, तो भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें सत्य विनायक पूर्णिमा व्रत का विधान बताया। इसी व्रत के प्रभाव से सुदामा की सारी दरिद्रता दूर हुई।

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