
नई दिल्ली। सरकारी बैंकों के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा एक बहुत बड़ा सुधार है। इसका उद्देश्य आसानी से लोन मुहैया (क्रेडिट ग्रोथ) और रोजगार के अवसर को बढ़ाना है। यह बात एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप में कही गई। इकोरैप के मुताबिक, बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 70 फीसदी है। इसलिए सरकार के इस फैसले से मुद्रा स्कीम को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी तक लगभग 9.18 करोड़ यूनिट्स को मुद्रा लोन दिए जा चुके हैं और इनमें से लगभग 80 फीसदी लोन महिला उद्यमियों को मिले हैं। मुद्रा स्कीम के तहत 1.68 करोड़ इंक्रीमेंटल जॉब्स निकली हैं। सरकारी बैंकों को अगले दो सालों में 2.11 लाख करोड़ रुपए की मदद देगी। इस मदद में रिकैपिटलाइजेशन बॉन्ड्स, बजटरी सपोर्ट और इक्विटी डाइल्यूशन शामिल हैं। बजट प्रावधानों के जरिए 18,139 करोड़ रुपए और रिकैपिटलाइजेशन बॉन्ड्स के जरिए 1.35 लाख करोड़ रुपए का इन्फ्यूजन किया जाएगा।
अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा
बैंकों को मिलने वाले पैकेज से सरकारी बैंकों की पूंजी पर्याप्तता अनुपात यानी सीएआर में बढ़ोतरी होगी। सीएआर बैंकों को कर्ज के जोखिम से निबटने में मदद करता है। अब अतिरिक्तपूंजी मिलेगी तो बैंकों को ज्यादा से ज्यादा कर्ज देने में सहूलियत होगी। ऐसी स्थिति में फंसी हुई परियोजनाओं के साथ-साथ नई परियोजनाओं के लिए पैसे का इंतजाम हो सकेगा। ये रोजगार के मौके बढ़ाने में मदद करेगा। एमएसएमई को ज्यादा लोन मिल पाएगी। मएसएमई को ज्यादा लोन मिल पाएगी।
एनपीए 8.35 लाख करोड़ पहुंचा
पीएसयू बैंकों समेत 39 लिस्टेड बैंकों का एनपीए बढक़र 8.35 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसे देखते हुए इंडस्ट्री और एक्सपर्ट्स ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। उनके अनुसार, पीएसयू बैंकों की कुल एसेट वैल्यू लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपए ही है, जबकि उनका एनपीए 7 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है। इससे उनके अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है।
Published on:
26 Oct 2017 10:35 am
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