
चार साल में आधी सांसद निधि नहीं खर्च पाए देश के माननीय, सरकार के छूटे पसीने
नर्इ दिल्ली। देश में चुनावाें का बिगुल बज चुका है। कर्इ राज्यों के चुनाव जल्द ही होने वाले हैं। राज्यों के इन चुनावों को लोकसभा चुनावों से पहले का सेमिफाइनल भी कहा जा रहा है। एेसे में जो रिपोर्ट सामने आर्इ है वो बेहद चौंकाने आैर डराने वाली है। वास्तव में देश के माननीय सांसद अभी तक आधी सांसद निधि खर्च नहीं कर सके। अब चुनाव नजदीक हैं तो देश की केंद्र सरकार के पसीने छूटे हुए हैं आखिर इन रुपयों को कैसे खर्च किया जाए? इसके लिए कर्इ योजनाएं आैर प्लानिंग तक बनार्इ गर्इ हैं। आइए आपको भी बताते हैं आखिर देश के माननियों को पांच साल में कितना रुपया सांसद निधि के रूप में मिलता है? अभी सांसद कितना रुपया खर्च कर चुके हैं? कितना रुपया अलाॅट होना बाकी है? साथ ही कितना रुपया अधिकारियों के पास अटका हुआ है?
12 हजार करोड़ खर्च नहीं कर सके हैं देश के माननीय
आपको जानकर हैरानी होगी कि आपके क्षेत्र के सांसदों को मिलने वाला विकास अभी तक आधा भी खर्च नहीं हो सका है। आंकड़ों के अनुसार सांसद विकास फंड के करीब 12000 करोड़ रुपए अभी तक अधिकारियों के फेर में अटके हुए हैं। अब केंद्र सरकार के पसीने छूटे हुए हैं कि आखिर इन रुपयों को किस तरह से खर्च किया जाए। अपने क्षेत्र के विकास कार्यों को कैसे गति दी जाए। आपको बता दें कि देश के लोकसभा आैर राज्यसभा सांसदों को हर साल विकास कार्य में खर्च करने के लिए पांच करोड़ रुपए अलाॅट किए जाते हैं।
पांच साल में इतनी दी जाती है रकम
देश के लोकसभा और राज्यसभा में मौजूदा समय में कुल सांसदों की संख्या 789 है। लोकसभा सांसदों की टेन्योर पांच आैर राज्यसभा सांसदों का टेन्योर छह साल का होता है। एेसे में इस बार दोनों सदनों के सांसदों को उनके पूरे कार्यकाल के लिए 20,945 करोड़ रुपए बतौर सांसद निधि आवंटित किए गए हैं। लेकिन अभी इनमें से 12 हजार करोड़ रुपए खर्च होना बाकी रह गया है। एेसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि देश के सांसद आपके चुने प्रतिनिधि राष्ट्रनिर्माण में कितना योगदान कर रहे हैं?
आखिर कहां अटके हुए हैं 12 हजार करोड़ रुपए
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ये रुपया सांसद क्यों खर्च नहीं कर सके हैं? प्राप्त जानकारी के अनुसार देश के माननीय 4773 करोड़ रुपए खर्च ही नहीं कर सके हैं। वहीं दूसरी आेर 7300 करोड़ रुपए यूटिलाइजेशन और ऑडिट सर्टिफिकेट के अभाव में अटके हुए हैं। एेसे में करीब 12000 करोड़ रुपए अभी तक या तो खर्च ही नहीं हुए या फिर अटके पड़े हैं। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी मुसीबत सामने खड़ी हो गर्इ है कि आखिर इन रुपयों को किस तरह से खर्च किया जाए?
अब केंद्र सरकार उठाने जा रही है यह कदम
- निधि खर्च करवाने के लिए अब केंद्र सरकार सभी मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी है
- सरकार अब सांसद निधि को मोबाईल ऐप से जोड़ने जा रही है
- दो महीने के बाद सांसदों के विकास कार्यों की जियो टैगिंग हो जाएगी
- जिससे प्रोग्रेस रिपोर्ट का ब्यौरा तत्काल अपडेट होगा
- जिम्मेदार नोडल अधिकारियों की ट्रेनिंग शुरू हो गई है
Published on:
31 Aug 2018 11:53 am
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