
एआईबीईए ने कहा-सार्वजनिक हित के खिलाफ है आईडीबीआई बैंक को निजी श्रेणी में डालना
नर्इ दिल्ली।अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से आईडीबीआई बैंक को निजी ईकाई की श्रेणी में रखने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। आरबीआई को बुधवार को लिखे एक पत्र में एआईबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने आरबीआई के फैसले पर यूनियन के विरोध के बारे में अवगत कराया।
वेंकटचलम ने कहा, "आईडीबीआई व आईडीबीआई बैंक को सार्वजनिक क्षेत्र के तहत बैंक बनाया गया था। कॉरपोरेट्स के अत्यधिक फंसे कर्ज की वजह से बैंक को वसूली में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और परिणामस्वरूप इसके वित्तीय प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है।"
उनके अनुसार, यह विडंबना है कि आरबीआई उधार लेने वालों निजी क्षेत्र के कॉरपोरेट के खिलाफ कार्रवाई की बजाय यह सूचना का अधिकार (आरटीआई), केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) और अन्य से बचाकर आईडीबीआई बैंक को फिर से वर्गीकृत कर रहा है। आरबीआई ने हाल में आईडीबीआई को निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत किया है।
आरबीआर्इ ने दिया था प्राइवेट का दर्जा
कुछ दिन पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने आईडीबीआई बैंक को प्राइवेट बैंक का दर्जा दिया गया था। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम ने आईडीबीआई बैंक का अधिग्रहण किया है। आरबीआर्इ ने एक सर्कुलर में कहा था कि आईडीबीआई बैंक को रेगुलेटरी मकसद से प्राइवेट बैंक की श्रेणी में रखा गया है। इस बैंक में एलआईसी के 51 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर लेने के बाद इस साल 21 जनवरी से यह फैसला लागू हो गया है। उसके बाद से बैंक के कर्मचारी भी काफी रोष में हैं।
Published on:
20 Mar 2019 02:09 pm
