नोटबंदी को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, इन नेताआें के बैंकों की झोली में आ गया था कुबेर का खजाना

नोटबंदी को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, इन नेताआें के बैंकों की झोली में आ गया था कुबेर का खजाना

Saurabh Sharma | Publish: Sep, 18 2018 11:55:44 AM (IST) | Updated: Sep, 18 2018 11:55:45 AM (IST) फाइनेंस

आरटीआर्इ से मिले जवाब में यह जानकारी निकलकर सामने आर्इ है कि नोटबंदी के दौरान राजनीतिक पार्टी के नेताओं द्वारा चलाए जा रहे सहकारी बैंकों में खूब पैसे जमा हुए हैं।

नर्इ दिल्ली। 2016 में निकला नोटबंदी का जिन्न अभी तक बोतल में बंद नहीं हुआ है। समय समय पर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब ताजा खुलासा हुआ है वो आैर भी चौंकाने वाला है। आरटीआर्इ से मिले जवाब में यह जानकारी निकलकर सामने आर्इ है कि नोटबंदी के दौरान राजनीतिक पार्टी के नेताओं द्वारा चलाए जा रहे सहकारी बैंकों में खूब पैसे जमा हुए हैं। जिसमें भाजपा , शिवसेना , कांग्रेस से लेकर तमाम पार्टियों के नेताआें के नाम शामिल हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस पार्टी के किस नेता के सहकारी बैंक में रुपया जमा हुआ है।

एेसे हुआ खुलासा
नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) के आरटीआई रिकॉर्ड्स से मिली जानकारी के अनुसार देश में 370 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों ने 10 नवंबर से 31 दिसंबर, 2016 तक 500 रुपए और 1000 रुपए के 22,270 करोड़ रुपए के पुराने नोट्स बदले। इनमें 18.82 फीसदी (4,191.3 9 करोड़ रुपये) शीर्ष दस जिला सहकारी बैंकों द्वारा किया गया। इनमें से चार गुजरात में हैं। चार महाराष्ट्र में, एक हिमाचल प्रदेश में और एक कर्नाटक में है। खास बात ये है कि इनप राज्यों की सरकारों के नेता ही इन बैंकों के अध्यक्ष हैं।

इन सहकारी बैंकों में सबसे ज्यादा रुपया जमा
- गुजरात के अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक में 745.59 करोड़ रुपए के पुराने नोट्स बदले गए हैं। इस फेहरिस्त में यह बैंक टाॅप है। जिसके डायरेक्टर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और अध्यक्ष बीजेपी नेता अजयभाई एच पटेल हैं।
- दूसरे नंबर पर राजकोट जिला सहकारी बैंक है, जहां पर 693.19 करोड़ रुपए बदले गए। इसके अध्यक्ष जयेशभाई राडियाडिया हैं।
- तीसरे नंबर पर पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक है, जिसके अध्यक्ष पूर्व एनसीपी विधायक रमेश थोरात हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे इसके निदेशकों में शामिल हैं। यहां 551.62 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले गए।
- कांगरा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक चौथे नंबर पर है। जहां पद 543.11 करोड़ रुपये बदले गए हैं। बैंक के अध्यक्ष कांग्रेस नेता जगदीश सपेहिया थे।
- पांचवे स्थान पर सूरत जिला सहकारी बैंक है, जहां 369.85 करोड़ रुपए बदले गए, जिसके अध्यक्ष भाजपा नेता नरेशभाई भिखाभाई पटेल हैं।
- सबरकंठा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक 328.5 करोड़ रुपए के साथ छठे स्थान पर है। इसके अध्यक्ष भाजपा नेता महेशभाई अमिचंदभाई पटेल हैं।
- सातवें नंबर पर साउठ केनरा जिला सहकारी बैक है, जहां 327.81 करोड़ रुपए बदले गए। इसके अध्यक्ष कांग्रेस नेता एमएन राजेंद्र कुमार है।
- आठवें पायदान पर नासिक जिला केंद्रीय सहकारी बैक है, जहां 319.68 करोड़ रुपए बदले गए। इसके अध्यक्ष शिवसेना नेता नरेंद्र दारडे थे।
- नौंवे नंबर पर सतारा जिला केंद्रीय सहकारी बैक है, जहां 312.04 करोड़ रुपए बदले गए। इस बैंक के अध्यक्ष राकंपा नेता छत्रपति शिवेनद्र सिंह राजे अभय सिंह राजे भोसले हैं।
- दसवें नंबर पर संगली जिला सहकारी बैंक है, जहां 301.08 करोड़ रुपए बदले गए। इसके उपाध्यक्ष संग्राम सिहं समपत्रो देशमुख हैं, जो भाजपा नेता हैं।

सत्ताधारी नेताआें के अधीन होते हैं सहकारी बैंक
आरटीआई से प्राप्त मिली जानकारी के अनुसार नाबार्ड के रिकाॅर्ड के अनुसार अधिकांश जिला सहकारी बैंक राजनेताओं के अधीन होते हैं। इनमें से ज्यादातर सत्ता से जुड़े नेता हैं। तमिलनाडु की लिस्ट में सलेम जिला सहकारी बैंक में सबसे ज्यादा 162.37 करोड़ रुपये पुराने नोट्स बदले गए, जिसके अध्यक्ष एआईएडीएमके नेता आर एलंगोवन हैं। वेस्ट बंगाल का में नाडिया जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष टीएमसी नेता शिबनाथ चौधरी हैं , जहां पर 145.22 करोड़ रुपए बदले गए। मध्यप्रदेश के खारगोन जिला सहकारी बैंक की कमान भाजपा नेता रंजीत सिंह दंडिर के पास है। वहीं यूपी के मेरठ जिला सहकारी बैंक पर सपा नेता जयवीर सिंह का हाथ है जहां पर 94.72 करोड़ रुपए।

नवंबर 2016 में की गर्इ थी नोटबंदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2016 को 500 आैर 1000 रुपए की करंसी को गैरकानूनी घोषित कर दिया था। जिसके बाद देश को पुराने नोट बैंकों में जमा कराने को कहा था। जिसकी वजह से देश को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। बैंकों में रुपया जमा कराने आैर नर्इ करंसी लेने की इस प्रक्रिया में 150 लोगों की जान तक चली गर्इ थी। लोगों के पुलिस की लाठियां तक खानी पड़ी थी। कुछ दिनों पहले आरबीआर्इ ने खुलासा किया है कि 98 फीसदी से ज्यादा रुपया बैंकों में वापस आ गया है।

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