आरबीआई का आम लोगों को तोहफा, अब RTGS और NEFT के लिए बैंकों की जरूरत नहीं

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 की पहली मॉनेटरी पॉलिसी में अहम फैसला लिया है। नॉन-बैंक पेमेंट संस्थानों के लिए आरबीआई द्वारा संचालित केंद्रीयकृत पेमेंट सिस्टम आरटीजीएस और एनईएफटी की सदस्यता की अनुमति दी गई है।

By: Saurabh Sharma

Updated: 07 Apr 2021, 04:03 PM IST

नई दिल्ली। केंद्रीय बैंक आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 की पहली मॉनेटरी पॉलिसी में अहम फैसला लिया है। नॉन-बैंक पेमेंट संस्थानों के लिए आरबीआई द्वारा संचालित केंद्रीयकृत पेमेंट सिस्टम आरटीजीएस और एनईएफटी की सदस्यता की अनुमति दी गई है। आरबीआई के इस प्रस्ताव से पीपीआई, कार्ड नेटवक्र्‍स, वाइड लेवल एटीएम ऑपरेटर्स जैसे नॉन-बैंक पेमेंट सिस्टम भी केंद्रीय बैंक द्वारा संचालित की जाने वाली आरटीजीएस और एनईएफटी की सदस्यता ले सकेंगे।

डिजिटल वित्तीय सुविधाओं को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी
इस प्रवृत्ति को मजबूत करने और भुगतान प्रणालियों में गैर-बैंकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों को रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित सीपीएस में सीधे सदस्यता लेने का प्रस्ताव है। इस सुविधा को बढ़ाने से वित्तीय सिस्टम में सेटलमेंट जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी और साथ ही देश में डिजिटल वित्तीय सुविधाओं को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। हालांकि, ये संस्थाएं इन सीपीएस में अपने लेन-देन के निपटान की सुविधा के लिए रिजर्व बैंक की किसी भी कैश की सुविधा के पात्र नहीं होंगी।

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ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में एक बार फिर कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को रेपो रेट को 4 फीसदी पर स्थिर रखने के केंद्रीय बैंक के फैसले की घोषणा की। आईबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए दास ने कहा कि रेपो रेट को 4 फीसदी पर और रिवर्स रिपो रेट को 3.35 फीसदी पर स्थिर रखने का फैसला लिया गया है।

महंगाई के अनुमान मेें किया बदलाव
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स इंफ्लेशन में आरबीआई ने बदलाव किया है। आरबीआई की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 2021 की चौथी तिमाही में सीपीआई इंफ्लेशन 5 फीसदी का अनुमान लगाया गया है। जबकि 2021-22 की पहली और दूसरी तिमाही में यह अनुमान 5.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4.4 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.1 फीसदी रखा है। 31 मार्च 2021 को, सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए क्रमश: 2 फीसदी और 6 फीसदी के निचले और ऊपरी टॉलरेंस लेवल के साथ महंगाई के टारगेट को 4 फीसदी पर बनाए रखने की बात कही है। जो अप्रैल 2021 से मार्च 2026 तक रहेगी।

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