आरबीआई का बैंकों को फरमान, जल्द लागू की 'ब्याज पर ब्याज' वापस करने की पॉलिसी

रिजर्व बैंक ने देश के सभी बैंकों और एनबीएफसी से कहा है कि 1 मार्च से लेकर 31 अगस्त 2020 तक मोराटोरियत के दौरान का ब्याज पर ब्याज लिया गया है उसे उधारकर्ताओं को वापस करने की पॉलिसी को तुरंत तैयार करें। इसके लिए आरबीआई की ओर नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है।

 

By: Saurabh Sharma

Updated: 08 Apr 2021, 11:43 AM IST

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों और एनबीएफसी को निर्देश दिया है कि वे 1 मार्च से 31 अगस्त, 2020 तक की अधिस्थगन अवधि के दौरान उधारकर्ताओं को दिए गए 'ब्याज पर ब्याज' को वापस करने या समायोजित करने के लिए बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति को तुरंत लागू करें। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने बड़े कर्जदारों को बड़ी राहत देते हुए फैसला सुनाया था कि कोविड-19 महामारी को देखते हुए सरकार द्वारा घोषित छह महीने की मोहलत के दौरान 2 करोड़ रुपए से अधिक के ऋण सहित किसी भी ऋण पर कोई दंड या चक्रवृद्धि ब्याज नहीं लिया जाएगा।

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ब्याज पर ब्याज वापस करने की पॉलिसी
सभी वाणिज्यिक बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए जारी एक अधिसूचना में, आरबीआई ने कहा, "इस निर्णय के अनुरूप सभी उधार संस्थानों को अधिस्थगन अवधि 1 मार्च, 2020 से 31 अगस्त, 2020 तक के दौरान उधारकर्ताओं को चार्ज किए गए 'ब्याज पर ब्याज' को वापस करने/समायोजित करने के लिए इसे बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के स्थान पर रखा जाएगा।" नोटिफिकेशन के अनुसार यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी उधार संस्थानों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को समान रूप से पत्र और आत्मा में लागू किया जाता है, विभिन्न सुविधाओं के लिए राशि की गणना या समायोजित करने के लिए कार्यप्रणाली को भारतीय बैंक संघ (आईबीए) द्वारा अन्य के परामर्श से अंतिम रूप दिया जाएगा। उद्योग के प्रतिभागियों और निकायों, जो सभी उधार संस्थानों द्वारा अपनाया जाएगा।

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सभी उधारकर्ताओं को मिलेगा लाभ
यह उल्लेख किया गया है कि राहत सभी उधारकर्ताओं पर लागू होगी, जिनमें से अधिस्थगन अवधि के दौरान कार्यशील पूंजी की सुविधाओं का लाभ उठाया गया था, चाहे वह पूरी तरह से या आंशिक रूप से लाभ उठाया गया हो या नहीं लिया गया हो। 31 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए वित्तीय विवरणों में उपरोक्त राहत के आधार पर उधार देने वाली संस्थाएं अपने उधारकर्ताओं के संबंध में वापस या समायोजित की जाने वाली कुल राशि का खुलासा करेंगी। बैंकों को लगभग 8,000 करोड़ रुपए नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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