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वित्तीय बाजार में तरलता पर RBI-SBI-SEBI सक्रिय, सख्त कदम उठाने के दिए संकेत

सोमवार सुबह वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी एक ट्वीट में कहा कि सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि बाजार में पर्याप्त मात्रा में तरलता बनी रहे।

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वित्तीय बाजार में तरलता पर RBI-SBI-SEBI सक्रिय, सख्त कदम उठाने के दिए संकेत

नर्इ दिल्ली। वित्तीय बाजार में तरलता की कमी के कारण बने नर्वस सेंटीमेंट को लेकर सरकारी संस्थाएं सक्रिय हो गई हैं। इस मामले को लेकर रविवार को भारतीय विनिमय एवं बाजार नियामक बोर्ड (सेबी), भारतीय रिजर्व बैंक और देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआर्इ की एक संयुक्त बैठक हुई। इस बैठक में तीनों संस्थाआें ने कहा कि वो बाजार में ठहराव लाने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। आरबीआर्इ एवं सेबी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक एवं बाजार नियामक सेबी, दोनों ही वित्तीय बाजार पर अपनी खास नजर बनाए हुए हैं आैर इसे लेकर सही समय पर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं। सोमवार सुबह वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी एक ट्वीट में कहा कि सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि बाजार में पर्याप्त मात्रा में तरलता बनी रहे।

क्या है वित्तीय बाजार
दोनों नियामकों का यह बयान एेसे समय पर आया है, जब बीते शुक्रवार को सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के शेयरों में मिनटों में ही भारी गिरावट देखने को मिली थी। एक मिनट में ही बाजार में करीब 1500 अंकों की गिरावट दर्ज की थी। इसके पहले भी इंफ्रास्ट्रक्चर लिजिंग एंव फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (IL&FS) की वजह से क्रेडिट मार्केट में उथल-पुथल देखने को मिली थी। इस समूह का इंटर काॅर्पोरेट डिपाॅजिट, काॅमर्स पेपर्स आैर आर्इडीबीआर्इ बैंक की क्रेडिट सुविधा लेटर को लेकर डिफाॅल्ट सामने आया था।


एसबीआर्इ चेयरमैन ने कहा- जारी रहेगा एनबीएफसी को वित्त पोषण
इसके पहले रिजर्व बैंक ने IL&FS के शेयरधारकों के साथ बैठक बुलार्इ थी। इस बैठक में IL&FS मामले के बाद इस बात की चिंता जतार्इ गई थी कि एनबीएफसी के लिए फंडिग की कमी हो जाएगी। हालांकि, रविवार को एसबीआर्इ के चेयरमैन रजनीश कुमार ने एक बयान जारी कर कहा कि एसबीआर्इ एनबीएफसी काे वित्त पोषण जारी रखेगी। रजनीश कुमार ने अपने बयान में कहा कि गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) को दिए जाने वाले वित्त पोषण को एसबीआर्इ के लिए चिंताजनक बताया जा रहा। ये पूरी तरह से निराधार एवं भ्रामक है। एसबीआर्इ नियामक नीति फ्रेमवर्क के तहत ही प्राइवेट आैर पब्लिक सेक्टर के एनबीएफसी को उधार देती है। वो इसे आगे भी जारी रखेगी।