रिजर्व बैंक ने एनसीएलएटी से कहा, कर्ज में डूबे ILFS के खातों को खातों को NPA में डालना जरूरी

  • आइएलएंडएफएस तथा उसकी कंपनियों के खातों को एनपीए में डालना जरूरी
  • आरबीआई ने कहा, 90 दिन की चूक के बाद बैंक इसे एनपीए में चिह्नित करें

By: Saurabh Sharma

Updated: 17 Apr 2019, 05:28 PM IST

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ( आरबीआई ) ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ( एनसीएलएटी ) से कहा है कि बैंकों के कर्ज में डूबे आइएलएंडएफएस तथा उसकी कंपनियों के खातों को उसके मूल परिपत्र तथा उच्चतम न्यायालय के फैसले के संदर्भ में एनपीए ( हृक्क्र ) के रूप में वर्गीकृत करना होगा।

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आरबीआई के आदेश
केंद्रीय बैंक ने कहा कि यह बैंकों की बाध्यता है कि 90 दिन की चूक के बाद वे इसे फंसे कर्ज (एनपीए) में चिह्नित करें और उन्हें इससे राहत नहीं मिल सकती है। शीर्ष बैंक के अनुसार यह एक प्रक्रिया है जिसका पालन प्रत्येक बैंक को करना ही होगा। आरबीआई का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल जैन ने एनसीएलएटी के समक्ष कहा कि निष्पक्ष लेखा ( ऑडिट ) के लिए बैंकों के बही-खातों का सही रूप से दिखना जरूरी है। आर्इएलएंडएफएस में समाधान के लिए जो भी प्रक्रिया है, हम केवल इतना बता रहे हैं कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुरूप बैंकों को फंसे कर्ज की स्थिति रिकार्ड में लेनी होगी।

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इससे पहले एनसीएलएटी ने दिए थे आदेश
भविष्य निधि और पेंशन फंड सहित छोटे लेनदारों को देय राशि के पुनर्भुगतान पर जोर देते हुए, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ( एनसीएलएटी ) ने मंगलवार की सुनवाई में कहा था कि आईएलएंडएफएस को छोटे लेनदारों के बकाए का भुगतान कर देना चाहिए और इस तरीके से करना चाहिए कि कम से कम 80 फीसदी बकाए की रकम का भुगतान हो जाए।

 

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Saurabh Sharma Desk/Reporting
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