
PF में कर्मचारियों द्वारा योगदान घटाने पर काफी नुकसान होता है। (PC AI)
PF Interest Calculatar: EPFO में हाल ही में हुए बदलावों के बाद अब कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF) में योगदान घटाकर न्यूनतम वैधानिक सीमा पर लाने का विकल्प मिला है। केवल वैधानिक वेतन सीमा 15000 रुपये तक ही 12 फीसदी का अनिवार्य योगदान लागू रहेगा। इस सीमा से अधिक वेतन पर भी 1800 रुपये पीएफ योगदान ही जरूरी है। लेकिन यदि कर्मचारी इस योगदान को बढ़ाना चाहते है, तो यह पूरी तरह स्वैच्छिक है, जो कंपनी और कर्मचारी की आपसी सहमति पर निर्भर करेगा। यानी अब अपनी पूरी बेसिक सैलरी से अनिवार्य रूप से केवल 1800 रुपये PF खाते में जमा कर सकते हैं और बची हुई पूरी सैलरी घर ले जा सकते हैं। लेकिन इससे आपकी मंथली टेक-होम सैलरी तो बढ़ जाएगी, पर रिटायरमेंट फंड काफी छोटा हो जाएगा। आइए समझते है इसका पूरा गणित।
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपए है। 12 फीसदी के हिसाब से पीएफ योगदान 6000 रुपये प्रति माह जाता है। नए नियमों के तहत अगर वह न्यूनतम अनिवार्य सीमा चुनता है, तो उसका पीएफ केवल 1800 रुपए कटेगा, जिससे उसकी टेक-होम सैलरी में हर महीने 4200 रुपये बढ़ जाएंगे।
EPFO में कर्मचारियों को एक एक्सट्रा लाभ यह भी है कि यदि कोई कर्मचारी समय से पहले नौकरी छोड़ देता है, तो उसे भी खाते में जमा मूलधन पर 58 वर्ष की उम्र तक ब्याज मिलता रहेगा। वहीं, अगर किसी बुजुर्ग ने 58 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट ले लिया है, तो उसे 61 वर्ष की उम्र तक ब्याज मिलता रहेगा। इसके बाद भी खाते से पैसा नहीं निकालने पर खाते को इनऑपरेटिव (निष्क्रिय) कर दिया जाएगा।
यदि आप 12 से 14 फीसदी की भारी ब्याज दर वाला पर्सनल या क्रेडिट कार्ड लोन चुका रहे हैं, तो पीएफ घटाकर लोन का प्री-पेमेंट करना 8.25 फीसदी के पीएफ रिटर्न से बेहतर परिणाम देगा। वहीं, वे निवेशक जो हाथ में आने वाले इस अतिरिक्त पैसे को अनुशासित रूप से बिना चूके हर महीने लंबी अवधि के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने का पक्का इरादा रखते है, तो उनको 8.25 फीसदी से बेहतर रिटर्न मिल सकता है।
Updated on:
06 Jul 2026 11:06 am
Published on:
06 Jul 2026 11:06 am
