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Car Insurance Tips: बारिश में गाड़ी पानी में डूबे तो भूलकर भी न करें ये गलती, वरना नहीं मिलेगा बीमा क्लेम

Car Insurance Claim: बाढ़ के पानी में गाड़ी डूबने से खराब हो जाती है। ऐसे में कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में इसका कवर शामिल होता है। लेकिन आपके द्वारा की गई कुछ गलतियों के कारण कंपनी क्लेम को रिजेक्ट कर देती है।
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Car Insurance Rejection Reason

Car का इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने से बचाएं। (फोटो: AI)

Car Insurance: मानसून आने के बाद देश के दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कई बड़े शहरों में हर साल भारी जलभराव के कारण हजारों गाड़ियां खराब हो जाती हैं। हालांकि, मोटर इंश्योरेंस में बाढ़ और पानी से होने वाले नुकसान को कवर किया जाता है, लेकिन कई पॉलिसीधारकों को इसका भुगतान नहीं मिलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे कुछ गलतियां करते हैं, जिससे उनका क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। ऐसे में अगर पानी से आपकी गाड़ी खराब हो जाए तो उसका क्लेम पाने के लिए आपको कुछ सावधानियां रखनी जरूरी हैं।

क्या इंश्योरेंस में फ्लड डैमेज कवर होता है?

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में बाढ़ या पानी से होने वाले नुकसान को कवर नहीं किया जाता। इसके बजाए कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी या स्टैंडअलोन ऑन-डैमेज पॉलिसी में इस तरह के नुकसान को कवर किया जा सकता है। लेकिन इसमें भी कई ऐसी शर्तें होती हैं जिन पर यदि ध्यान न दिया जाए तो क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता है। दरअसल, कई गाड़ी मालिकों को लगता है कि उनकी कॉम्प्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी हर नुकसान की भरपाई करेगी, लेकिन पानी में फंसने के बाद गाड़ी स्टार्ट करने से होने वाला नुकसान बीमा कंपनियां कवर नहीं करती।

क्लेम रद्द होने की सबसे बड़ी वजह

सही समय पर सही कदम उठाकर इंश्योरेंस क्लेम को रिजेक्ट होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए आपको इस बात का ध्यान सबसे ज्यादा रखना है कि अगर गाड़ी पानी में डूबी है, तो उसे स्टार्ट न करें। इंजन में पानी घुसने पर स्टार्ट करने से पानी सिलेंडर तक पहुंच जाता है। पानी हवा की तरह दब नहीं सकता, जिससे पिस्टन मुड़ या टूट सकते हैं। इसे हाइड्रो-लॉकिंग कहते हैं। बीमा कंपनियां इसे जानबूझकर की गई गलती मानती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में क्लेम खारिज हो जाता है।

गाड़ी बंद होते ही करें ये काम

गाड़ी के पानी में डूबने या इंजन में पानी जाने के बाद तुरंत इंजन बंद करें। संभव हो तो बैटरी डिस्कनेक्ट करें और दूबारा गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश न करें। गाड़ी को पानी से निकालने के लिए टोइंग सर्विस का ही इस्तेमाल करें। जहां तक संभव हो बीमा कंपनी के अधिकृत टोइंग का इस्तेमाल करें। गाड़ी हटाने से पहले उसकी फोटो और वीडियो बनाएं। पानी का लेवल, गाड़ी की नंबर प्लेट, जगह और तारिख सभी को वीडियों में शामिल करें। इसके साथ ही टोइंग का बिल संभालकर रखें। सर्वेयर की जांच से पहले गाड़ी की मरम्मत न कराएं, वरना क्लेम में दिक्कत आ सकती है।

बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें

कस्टमर केयर हेल्पलाइन, ऐप या ईमेल से बीमा कंपनी को तुरंत सूचित करें और क्लेम नंबर जरूर लें। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के नियमों के मुताबिक बीमा कंपनियों को जल्द से जल्द सर्वेयर भेजना होता है और सभी दस्तावेज मिलने के 30 दिन में क्लेम निपटाना होता है।