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जीएसटी और सेस में वृद्धि के सुझाव, क्योंकि रेवेन्यू बढ़ाने का है दबाव

जीरो फीसदी वो सामानों को दोबारा टैक्स के दासरे में जा सकती है परिषद नए सेस और पुराने सेस में इजाफे पर भी परिषद कर रही है विचार वेस्ट बंगाल ने वित्त मंत्री सीतारमण के सुझावों का किया हे विरोध

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Saurabh Sharma

Dec 18, 2019

Nirmala Sitharaman

Suggestions for increase in GST, cess, pressure to increase revenue

नई दिल्ली। देश की वित्तीय हालत ठीक नहीं है। सरकार पर अब ज्यादा रेवेन्यू जेनरेट काने का दबाव आ गया है। जिसके लिए कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। जहां कोई जीएसटी दर ( GST rate ) में बढ़ोतरी की बात कर रहा है तो कोई साथ सेस ( Cess ) बढ़ाने या कोई नया सेस जोडऩे की सिफारिश कर रहा है। इसलिए जीएसटी परिषद ( GST Council ) की मीटिंग से पहले सरकार की ओर से सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों से सुझाव मांगे थे। ताकि आज होने वाली मीटिंग में इन सब बातों पर चर्चा की जा सके। इस मामले में वेस्ट बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ( West Bengal finance minister Amit Mitra ) का जवाब आया है वो सरकार सोच के बिल्कुल विपरीत है। लेकिन परिषद क्या फैसला लेगी वो भविष्य के गर्भ में छिपा है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर वेस्ट बंगाल के एफएम ने क्या कहा है और परिषद क्या फैसला ले सकती है?

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आज होने जा रही है अहम जीएसटी परिषद की बैठक
आज कमजोर जीडीपी आंकड़ों और आर्थिक मंदी के बीच जीएसटी परिषद की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में जिन वस्तुओं पर खत्म किए जीएसटी को दोबारा से लागू किया जा सकता है। साथ ही कुछ नए सेस और पुराने सेस की दरों में इजाफा भी किया जा सकता है। आखिर सवाल पैदा ही क्यों हुआ? वास्तव में देश की सरकार को जितना राजस्व मिलना चाहिए वो नहीं मिल रहा है। जिसकी वजह से देश को चलाना काफी मुश्किल हो रहा है। इसके बीच रेवेन्यू कम होने से राज्यों को क्षतिपूर्ति भुगतान करने में देरी भी हो रही है। ऐसे में आज जीएसएटी परिषद की मीटिंग में अध्यक्ष निर्मला सीतारमण सख्त कदम उठा सकती हैं।

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बंगाल ने किया है मीटिंग से पहले विरोध
वहीं निर्मला सीतारमण द्वारा मांगे गए सुझावों में वेस्ट बंगाल के एफएम का स्टेटमेंट आ गया है। यह स्टेटमेंट केंद्र सरकार और जीएसटी परिषद की अध्यक्ष निर्मला सीतारमण की नीतियों और उपायों का विरोण कर रहा है। राज्य सरकार के अनुसार देश की इकोनॉमी सुस्ती का सामना कर रही है। जिसका असर राज्यों पर भी दिखाई दे रहा है। इस सुस्ती से देश का कंज्यूमर और प्रोड्यूसर दोनों दबाव में हैं। ऐसे में टैक्स से बाहर की गई वस्तुओं को दोबारा जीएसटी के दायरे में लाना और सेस बढ़ाना ठीक नहीं है। वेस्ट बंगाल के एफएम मित्रा के अनुसार मौजूदा समय में मांग और कारोबार बढऩे के बिना मुद्रास्फीति में इजाफे की संभावना बनी हुई है। ऐसे समय में कर ढांचे में किसी भी तरह का बदलाव करना अथवा कोई नया सेस लगाना ठीक नहीं होगा। अमित मित्रा ने कहा कि मौजूदा संकट से उबरने के लिए सरकार नई दरें और नए कर बढ़ाने के अलावा उद्योगों को राहत पहुंचाने के तौर तरीके तलाशने चाहिए। ज्यादा राजस्व जुटाने के लिए सरकारी एजेंसियों को टैक्स चोरी और धोखाधड़ी रोकनी होगी। आपको बता दें कि राज्यों को केन्द्र सरकार ने कुल 35,298 करोड़ रुपए की राशि जारी की है।

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लगातार बढ़ रही है महंगाई और घट रही है विकास दर
देश की मुद्रास्फीति में लगातार इजाफा हो रहा है। खाद्य उत्पादों के बढ़ते दाम की वजह से नवंबर महीने में खुदरा महंगाई दर तीन साल के उच्चतम स्तर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई। वहीं थोक महंगाई दर अक्टूबर के मुकाबले तीन गुना ज्यादा इजाफे साथ चढ़ गर्ठ है। औद्योगिक उत्पादन की बात करें तो लगातार तीसरे माह घटता हुआ अक्टूबर में 3.8 फीसदी पर आ गया है। अगर बात देश की जीडीपी की करें तो दूसरी तिमाही की जीडीपी 6 साल के निचले स्तर पर आते हुए 4.5 फीसदी पर पहुंच गई। यह हालत यहीं नहीं रुकने वाले हैं। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी अनुमान को कम करते हुए 5 फीसदी पर पटक दिया है। वहीं आईएमएफ भी साफ संकेत दे चुका है कि अगले महीने की रिपोर्ट में वो भी भारत के जीडीपी अनुमान को कम करेंगे।