कौन उठाएगा इसका Loan Moratorium का बोझ, सरकार या बैंक?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि Loan Moratorium के दौरान ब्याज पर ब्याज ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। वहीं सरकार पहले ही 2 करोड़ से कम वाले लोन पर राहत दे चुकी है। अब सवाल यह है कि ताजा फैसले के बाद पडऩे वाले बोझ को कौन वहन करेगा।

By: Saurabh Sharma

Published: 29 Mar 2021, 02:45 PM IST

Loan Moratorium। कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने Loan Moratorium मामले में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मोराटोरियम की अवधि को नहीं बढ़ाया जाएगा, साथ ही लोन का पूरा ब्याज माफ नहीं होगा। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोराटोरियम के दौरान ब्याज पर ब्याज लेने से भी साफ इनकार कर दिया है। अब सवाल यह है कि इस फैसले के बाद पडऩे वाले वित्तीय बोझ को कौन अपने सिर लेगा। सरकार या बैंक? यह सवाल इसलिए भी है क्योंकि केंद्र पहले ही दो करोड़ से कम वाले लोन वित्तीय बोझ अपने सिर पर ले चुकी है। जिसकी भरपाई भी बैंकों को हो चुकी है। आइए आपको भी बताते हैं इस पूरे मैटर के बारे में...

यह भी पढ़ेंः- एमपीसी की बैठक में नरम रुख जारी रख सकता है आरबीआई, क्या कहते हैं जानकार

कितना आ सकता है बोझ?
मीडिया के रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी का कहना है कि मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए बैंक पूरी तरह से तैयार है। सरकार की ओर से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। 2 करोड़ रुपए से कम लोन पर ब्याज पर ब्याज ना लेने का नुकसान सरकार पहले की उठा चुकी है। वहीं नए फैसले के बाद बैंकों पर 7 से 10 हजार करोड़ रुपए का बोझ बढ़ सकता है। जिसकी वजह से बैंक और सरकार दोनों के माथे पर बल साफ देखें जा सकते हैं।

यह भी पढ़ेंः- Gold And Silver Price : न्यूयॉर्क में सस्ता हुआ सोना, जानिए भारत में कीमतों पर क्या होगा असर

किसके सिर पर आएगा बोझ?
सरकार की ओर से अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट की ओर से ऐसा नहीं निर्देश नहीं है कि यह बोझ सरकार को वहन करना है। वहीं बैंकों को भी ऐसा कोई निर्देश नहीं है कि ब्याज पर ब्याज के तहत वसूला गया रुपया कब तक देना है। ऐसे में वो टुकड़ों-टुकड़ों में भी पेमेंट कर सकते हैं। अधिकारी के अनुसार इस मामले में जल्द फैसला लिया जाएगा। आईसीआरए के अनुमान के अनुसार सभी कर्जदारों को 6 महीने की मोरेटोरियम अवधि के दौरान चक्रवृद्धि ब्याज करीब 13,500 से 14,000 करोड़ रुपए है और सरकार 2 करोड़ रुपए तक के लोन पर राहत दे चुकी है। इससे सरकारी खजाने पर 6,500 करोड़ रुपए का बोझ पड़ा है।

Saurabh Sharma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned