
फिरोजाबाद। देश और प्रदेश में सरकार किसी भी पार्टी की रही हो लेकिन किसी ने सुहाग नगरी में मजूदरों के उत्थान के लिए कार्य नहीं किया। देश विदेश में चूड़ियों की खनक के लिए प्रसिद्ध फिरोजाबाद में कांच उद्योग अपना अस्तित्व बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। विगत 10 वर्ष की तुलना करें तो करीब आधा दर्जन से अधिक फैक्ट्रियों में ताले लग चुके हैं और कई बंदी की कगार पर हैं। कई सरकार आई और चली गई लेकिन सुहाग नगरी से चल रहे कइयों के सुहाग की ओर किसी ने ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। यहां तक कि चूड़ियों की खनक में मजदूरों का हक भी कहीं खो गया है।
लाखों मजदूरों की चल रही रोजी रोटी
फिरोजाबाद में करीब 60 से 70 फैक्ट्रियां संचालित हैं। इनमें लाखों मजदूर काम करके परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। इनमें अधिकतर ऐसे लोग हैं जो रोज मेहनत करके रोज खाते हैं। इनमें से कभी-कभी कुछ मजदूर ऐसे भी होते हैं जिन्हें देर से फैक्ट्री पहुंचने पर काम नहीं मिल पाता और उस दिन उन्हें भूखा ही सोने को विवश होना पड़ता है। इन मजदूरों की व्यथा जानने की आज तक किसी ने कोशिश नहीं की। चुनाव के समय यहां बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं की जाती हैं लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद वादे पूरे करना तो दूर पास आने वाले मजदूरों की व्यथा सुनने को भी कोई तैयार नहीं होता। कर्द दशक से मजदूर इसी सहारे जीवन यापन कर रहे हैं कि सरकार कभी तो उनकी ओर इनायत करेगी।
न आवास न ईएसआई अस्पताल
सुहाग नगरी की कांच फैक्ट्रियों में कार्यरत मजदूर वर्ग के लिए सरकार द्वारा न तो आवास की व्यवस्था की गई है और न ही ईएसआई अस्पताल की ही जबकि इतनी काफी संख्या में मजदूर यहां काम करते हैं जिनके पास ईएसआई का कार्ड तो बना है लेकिन उसका लाभ लेने के लिए उन्हें आगरा की दौड़ लगानी पड़ती है। सरकार ने यदि इस ओर कोई ध्यान दिया होता तो शायद मजदूर वर्ग का कुछ भला हो गया होता। कुछ दिन बाद दीपावली का त्योहार है। मजदूर वर्ग द्वारा सरकार से मांग की गई है कि वह मजदूरों के हित को ध्यान में रखते हुए फिरोजाबाद में ईएसआई अस्पताल और आवास उपलब्ध कराए।
कैबिनेट मंत्री ने भी नहीं दिया ध्यान
फिरोजाबाद जिले की टूंडला विधानसभा से कैबिनेट मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल हैं। इसके बाद भी मजदूर वर्ग का भला नहीं हो पा रहा है। प्रो. बघेल के मंत्री बनने के बाद मजदूर वर्ग में काफी उम्मीदें जगी थी लेकिन मंत्री द्वारा भी कोई कार्य न कराने से मजदूर वर्ग को निराशा ही हाथ लगी है।
Published on:
11 Oct 2017 12:29 pm
