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अपने ही गढ़ में चारों खाने चित हुई सपा, जमानत भी न बच सकी

यह रामगोपाल यादव की बड़ी हार है। फिरोजाबाद, टूंडला और जसराना में सपा प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।

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ramgopal Akhilesh

फिरोजाबाद। अपने ही गण में समाजवादी पार्टी की ये हालत होगी यह खुद सपाइयों को जानकारी नहीं होगी। इस जिले के सांसद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव हैं, बावजूद इसके वह फिरोजाबाद मेयर पद के चुनाव में अपने ही प्रत्याशी की जमानत तक नहीं बचा सके। सपा की इस करारी हार से पार्टी नेताओं में खलबली मची हुई है। यहां सपा की हार का मतलब प्रो. रामगोपाल यादव की हार है। प्रो. रामगोपाल यादव ने यहां से अपने पुत्र को सांसद बनाया था। उस समय विरोधियों के हौंसले पस्त हो गए थे। यहां तक कि उस दौरान सपा ने भाजपा खेमे में खलबली मचा दी थी।


यहां हुई सपा प्रत्याशियों की जमानत जब्त

फिरोजाबाद में पहली बार महापौर पद के लिए चुनाव हुआ, इसलिए समाजवादी पार्टी के लिए यह सीट काफी महत्वपूर्ण थी। फिरोजाबाद में भाजपा प्रत्याशी नूतन राठौर को 98932 मत मिले, जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की जबकि सपा प्रत्याशी सावित्री देवी 45925 मत प्राप्त करने के बाद भी अपनी जमानत नहीं बचा सकी। मतगणना पूरी होने से पहले ही सपाई मतगणना केन्द्र से बाहर निकल गए थे। सपाइयों ने ईवीएम में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था। फिरोजाबाद के अलावा टूंडला में भी सपा प्रत्याशी राजकुमारी की जमानत जब्त हो गई। सपा प्रत्याशी को यहां 2127 मत प्राप्त हुए थे जबकि जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी रामबहादुर चक को 8854 मत प्राप्त हुए थे। कभी सपा का किला कहे जाने वाले जसराना में सपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। यहां सपा से बागी हुए सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदार रामवीर यादव लगातार चार बार विधायक रहे हैं। सपा से बगावत करने के बाद अब निकाय चुनाव में सपा प्रत्याशी अंशुल विक्रम सिंह की जमानत तक जब्त हो गई। उन्हें मात्र 825 मत प्राप्त हुए हैं जबकि जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी अवनीश को 1479 मत प्राप्त हुए।


कैबिनेट मंत्री ने लहराया परचम

फिरोजाबाद की टूंडला विधानसभा से भारी बहुमत से जीतने वाले प्रो. एसपी सिंह बघेल को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों की जीत का जिम्मा कैबिनेट मंत्री के कांधों पर था। खास तौर से टूंडला नगर पालिका के लिए कैबिनेट मंत्री ने पत्नी समेत घर-घर जाकर वोट मांगे थे। उन्होंने भारी बहुमत से भाजपा प्रत्याशी को जिताकर अपना झंडा बुलंद कर लिया लेकिन सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव अपनी प्रतिष्ठा नहीं बचा सके। सपा को जिले में करारी हार का सामना करना पड़ा। सपा की हार के बाद से सपा जिलाध्यक्ष रामसेवक यादव से जिलाध्यक्ष पद छोड़ने की मांग भी उठने लगी है। हालांकि सपाई इस पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।