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हनुमान की प्रतिमा को आता है पसीना, आज तक बना हुआ है रहस्य

शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर यमुना किनारे स्थित है हनुमान जी का अद्भुत मंदिर।

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hanuman Jayanti

फिरोजाबाद। भगवान राम के भक्त, सेवक और महाबलशाली हनुमान जी की कहानी बड़ी ही विचित्र है। भगवान राम के 14 वर्ष के बनवास में उनके सभी कष्टों में साथ रहने वाले हनुमान जी सुहागनगरी में पसीने वाले हनुमान के नाम से मशहूर हैं। उनकी ख्याति शहर में ही नहीं बल्कि आस-पास क्षेत्र में भी है। मंदिर पर हनुमान जयंती को विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वहीं प्रत्येक मंगलवार को मंदिर पर दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

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चन्द्रवाड़ में बसा है यह मंदिर

यमुना किनारे शांत और स्वच्छ वातावरण के बीच बसे इस मंदिर में बैठने मात्र से मन को काफी सुकून मिलता है। हर कोई चाहता है कि हनुमान जी के इस मंदिर में बैठ कर उनकी सेवा की जाए। उनका आशीर्वाद लिया जाए लेकिन ऐसी सेवा उन्हीं की पूरी होती है जिनके ऊपर हनुमान जी का आशीर्वाद और कृपा रहती है।

मंदिर परिसर में होता है भंडारे का आयोजन

मंदिर परिसर में समय-समय पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु पसीना वाले हनुमान जी की महिमा जानने को व्याकुल नजर आते हैं। तमाम लोगों ने यह जानने की भरपूर कोशिश की कि आखिर हनुमान जी को पसीना कहां से आता रहता है। किस प्रकार पसीना आने के कारण वह चोला छोड़ देते हैं। उनको पसीना आने के पीछे आज तक एक रहस्य ही बना हुआ है।

पहले होती है श्रीराम की स्तुति

मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के बैठने के भी पूरे प्रबंध किए गए हैं। मंदिर में जो भी श्रद्धालु हनुमान जी की आराधना करने आता है उसे पहले श्रीराम की स्तुति करनी पड़ती है। उसके बाद हनुमान की पूजा होती है। बताया जाता है कि श्रीराम की स्तुति करने से हनुमान जी शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं।