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रोजगार की तलाश में मुफलिसी मौत बन गई, घर पहुंचने के लिए भी नहीं रहे पैसे तो पत्नी सफर में ही किया अंतिम संस्कार

झारखंड से जालंधर मजदूरी करने पत्नी और बच्चों के साथ जा रहा था मृतक। पत्नी शव वापस ले जाने में असमर्थ थी तो सफर में ही किया अंतिम संस्कार।

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रोजगार की तलाश में मुफलिसी मौत बन गई, घर पहुंचने के लिए भी नहीं रहे पैसे तो पत्नी सफर में ही किया अंतिम संस्कार

फिरोजाबाद। झारखंड के एक गरीब परिवार की बेबसी को देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। मजदूरी खोजने पंजाब जा रहे एक मजदूर की ट्रेन में मौत हो गई। पति की मौत से गमजदा पत्नी के पास इतने भी रुपए नहीं थे कि पति का अंतिम संस्कार करा पाती। इतनी दूर से गरीब परिजनों ने भी आने में असमर्थता जता दी। पत्नी के आंसुओं को देख जीआरपी ने पहल की तथा अपने खर्च पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। इसके बाद पांच वर्ष के बेटे ने बगैर परिजनों की मौजूदगी में मुखाग्नि दी। अब जीआरपी मृतक की पत्नी, उसकी पुत्री, पुत्र को अपने खर्चे पर घर भिजवाने की तैयारी कर रही है।

झारखंड का रहने वाला था मृतक

झारखंड के जिला पलामू थाना तरहसी के गांव जेदू निवासी 40 वर्षीय संतू अपनी पत्नी समरी, पांच वर्षीय पुत्र संदीप और दो वर्षीय बेटी खुशबू के साथ मुरी एक्सप्रेस से पंजाब के जालधंर मजदूरी करने जा रहा था। वह जरनल कोच के डिब्बे में ऊपरी बर्थ पर सो रहा था, जबकि पत्नी बच्चों के साथ नीचे वाली बर्थ पर बैठी थी। पत्नी समरी ने संतू को जगाया तो वह नहीं जागा। पति की यह स्थिति देख पत्नी रो पड़ी। घर से इतनी दूर पति के इस हाल में किससे मदद की गुहार लगाए। जब कोच में बैठे अन्य यात्रियों ने यह स्थिति देखी तो उन्होंने जीआरपी कंट्रोल रूम को सूचना दी। टूंडला स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने पर जीआरपी कर्मी डॉक्टर को लेकर पहुंचे, जिन्होंने इसे मृत घोषित कर दिया। पति की मौत की खबर सुन समरी फूट-फूट कर रोने लगी। मासूम बच्चे भी कुछ समझ नहीं पाए। पुलिस शव को लेकर अस्पताल आई।

शव साथ ले जाने की बात पर रो पड़ी पत्नी

पोस्टमार्टम होने के बाद जीआरपी सिपाही विनीत चौधरी ने समरी से कहा शव को घर ले जाओ तो समरी बिलख पड़ी। वापस लौट जाने के लिए भी रुपए नहीं थे, ऐसे में शव को कैसे ले जाएगी। सिपाहियों ने परिजनों को सूचित किया तो इतनी दूर आने में उन्होंने भी असमर्थता जता दी। महिला की बेबसी को देख सिपाही ने खुद ही दाह संस्कार का इंतजाम किया। शव को जलेसर रोड स्थित मरघटी पर ले गया, जहां पर पांच वर्ष के बेटे ने मुखाग्नि दी। इसके बाद सिपाही अपने किराए से पत्नी और बच्चों को टूंडला ले गया। जहां पर उनके लिए घर वापसी की टिकट का इंतजाम किया।

भूखे थे बच्चे, लोगों ने दिए बिस्किट

बुधवार शाम को शव मिलने के बाद से ही मां गम में डूबी थी। इधर छोटे-छोटे बच्चे भूखे बिलख रहे थे। जब अस्पताल में कुछ लोग पहुंचे तो वह भी यह नजारा देख दुखी हो गए। बच्चे अपनी मां से बार-बार भूखे होने की बात करते तो महिला पति की मौत के गम में डूबी थी। ऊपर से बच्चों की फरियाद उसे और दुखी कर देती। महिला के पास एक भी रुपया नहीं था। ऐसे में यहां पर मौजूद लोगों ने चंदा कर बच्चों को बिस्कुट खिलाए। वहीं महिला को कुछ रुपए भी दिए।

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