आगरा. मां के हाथ के खाने की कोई होड़ नहीं होती। जब तक घर में रहते हैं, तब तक इस बात का अंदाजा नहीं होता कि मां के हाथ का बना खाना सेहत के लिए वरदान है, लेकिन जैसे ही पांव घर से बाहर पड़ते हैं, इसका मूल्य पता चल जाता है। डॉक्टर्स भी इस बात को मानते हैं कि मां के हाथ का खाना या कहें घर का खाना ही बेस्ट होता है। लेकिन, जो लोग घरों से दूर रह रहे हैं, उनके लिए ये संभव नहीं होता। ऐसे में वे जल्द बीमारियों की चपेट में आते हैं और उनकी सेहत भी बिगड़ जाती है। इसके अलावा फास्ट फूड का कल्चर भी लोगों की विशेषकर युवाओं की सेहत को बिगाड़ रहा है।