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दिल्ली-NCR में आज भी इंटरनेट सेवाएं बंद, इस मामले में भारत दुनियाभर में सबसे आगे

दिल्ली-NCR में आज भी इंटरनेट सेवाएं बंद भारत इस मामले में भारत दुनियाभर में सबसे आगे

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Airtel Vodafone Idea confirmed internet shutdown in Delhi NCR

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने दिल्ली, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 19 दिसंबर की रात 10:00 से लेकर 20 दिसंबर की रात 10:00 बजे तक सभी इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। इस पूरे मामले पर टेलीकॉल कंपनियों एयरटेल, वोडाफोन-आईडिया का कहना है कि सरकार के आदेश पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में वॉयस, SMS और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गयी है जिन्हें सरकार के आदेश के बाद ही बहाल किया जाएगा।

बता दें कि इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनैशनल इकनॉमिक रिलेशन्स समेत दो थिंक टैंक संस्थाओं के रिसर्च के मुताबिक, इंटरनेट बंद करने के मामले में भारत दुनियाभर में सबसे आगे है। इंटरनेट बंद करने की वजह से देश को बड़ा आर्थिक नुकसान भी हुआ है। देश में साल 2012 से सरकार ने 367 बार इंटरनेट सस्पेंड किया। खास बात यह है कि अकेले साल 2018 में दुनियाभर के इंटरनेट शटडाउन का 67 पर्सेंट सिर्फ भारत में हुआ है।

जनवरी 2012 से जनवरी 2019 के बीच 60 बार 24 घंटे से कम समय का इंटरनेट शटडाउन हुआ। वहीं, 55 बार 24-72 घंटे के लिए इंटरनेट बंद किया गया। 39 बार 72 घंटे से ज्यादा समय के लिए इंटरनेट शटडाउन हुआ। वहीं, साल 2012 से 2017 के बीच 16 हजार घंटे से ज्यादा समय तक इंटरनेट बंद रहा। कश्मीर में 5 अगस्त 2019 से इंटरनेट शटडाउन चल रहा है, जो अभी तक जारी है। इसका मतलब है कि यहां 136 दिनों से इंटरनेट बंद है।

2012 से 2019 तक इंटरनेट बंद किए जाने वाले टॉप 5 राज्यों में जम्मू-कश्मीर सबसे आगे है। इसके बाद राजस्थान, यूपी, हरियाणा, बिहार और गुजरात हैं। जम्मू-कश्मीर में 180 बार, राजस्थान में 67 बार, यूपी में 20 बार, हरियाणा में 13 बार, बिहार में 11 बार और गुजरात में 11 बार इंटरनेट बंद हुआ। वहीं, 2012 से 2019 के बीच देश भर में कुल 367 बार इंटरनेट सस्पेंड हुआ है।

नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में 9 दिसंबर, 2019 को पास किया गया था और फिर इसके बाद 11 दिसंबर, 2019 को राज्यसभा में एक लंबी बहस के बाद बिल को पास किया गया। इसके बाद से ही देशभर के अलग-अलग हिस्सों में बिल के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गया। इस दौरान न सिर्फ प्रदर्शनकारियों को चोट पहुंची है बल्कि पुलिस के कई जवान भी इसमें घायल हुए हैं।