
सीएम योगी ने हरीश राणा के परिवार को 10 लाख रुपए मदद की घोषणा की, PC- Patrika
गाजियाबाद : हरीश राणा के परिवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद की। हरीश राणा के घर पर यूपी सरकार के अधिकारी पहुंचे और उन्होंने सीएम के निर्देश पर आर्थिक मदद की घोषणा की और हर संभव मदद की पेशकश भी की।
हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत मिली थी। 11 मार्च को हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। 14 मार्च को हरीश राणा को दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। 14 मार्च से हरीश राणा की पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया शुरू की गई थी। कोर्ट ने साफ हिदायत दी थी कि लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाते समय व्यक्ति की गरिमा का विशेष ख्याल रखा जाए और उसे इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का कष्ट न हो। हरीश राणा ने 31 साल की उम्र में मंगलवार को एम्स में अंतिम सांस ली। हरीश राणा 13 साल तक कोमा में रहे और 10 दिन का 'पैसिव यूथेनेशिया' के बाद एम्स में उनका संघर्षों भरा सफर समाप्त हुआ।
हरीश राणा के पिता बेटे की अस्थियां लेकर हरिद्वार प्रवाहित करने के लिए जाएंगे। 24 मार्च को हरीश राणा ने अंतिम सांस ली। 25 मार्च को हरीश राणा का अंतिम संस्कार किया गया। 26 मार्च की सुबह हरीश राणा के पिता अस्थियां इकट्ठा करने के लिए श्मशान घाट पहुंचे। इन अस्थियों को लेकर वह हरिद्वार में प्रवाहित करने के लिए जाएंगे।
हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने आर्थिक मदद के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि हम यूपी सरकार के बहुत-बहुत आभारी हैं। योगी आदित्यनाथ की तरफ से 10 लाख की आर्थिक मदद की बात कही गई है। मुख्यमंत्री के आदेश पर जिलाधिकारी, जीडीए के वीसी और कमिश्नर अशोक राणा के घर पहुंचे।
हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। वह इस दौरान हॉस्टल में रहते थे। 2013 में हरीश हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। चौथी मंजिल से गिरने की वजह से हरीश का शरीर लकवा मार गया था। हरीश तभी से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। वह न कुछ बोल सकते हैं और न ही उनके शरीर का कोई अंग हिलता-ढुलता है। वह कुछ भी महसूस नहीं कर सकते।
परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया (कहा गया कि वे टर्मिनली इल नहीं हैं क्योंकि वे खुद सांस ले सकते हैं)। जब हाईकोर्ट में याचिका खारिज हो गई तो परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने प्राइमरी और सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड गठित किए। दोनों बोर्डों ने रिपोर्ट दी कि हरीश की स्थिति स्थिर है और रिकवरी की कोई संभावना नहीं है।
11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। भारत में पहली बार पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दी। विशेष रूप से डॉक्टरी देखरेख में दिये जाने वाले न्यूट्रिशन एवं हाइड्रेशन के लिए लगाए गए फीडिंग ट्यूब हटाने की अनुमति दी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पिता ने कहा था, हम इसके लिए लंबे समय से लड़ रहे थे। कौन से माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा चाहेंगे। पिछले 3 साल से हम यह मामला लड़ रहे थे। मेरा बेटा पंजाब यूनिवर्सिटी में टॉपर हुआ करता था।
Published on:
26 Mar 2026 03:35 pm
बड़ी खबरें
View Allगाज़ियाबाद
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
