
Delhi-Meerut Expressway
Delhi-Meerut Expressway: राजधानी की सीमाओं पर एक बार फिर तनाव और थमी हुई रफ्तार का नजारा देखने को मिल रहा है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) पर सफर करने वाले यात्रियों को मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। गाजियाबाद और दिल्ली पुलिस की ओर से बॉर्डर पर बढ़ाई गई सख्त बैरिकेडिंग और सघन चेकिंग अभियान की वजह से गाड़ियों का पहिया पूरी तरह थम सा गया।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम, कौशांबी और खोड़ा थाना क्षेत्र की पुलिस सीमा पर तैनात है। पुलिस द्वारा हर संदिग्ध वाहन की बारीकी से तलाशी ली जा रही है, जिससे एक्सप्रेसवे पर कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।
असल में इस पूरे उपद्रव और ट्रैफिक संकट के पीछे किसानों का आक्रोश है। मेरठ, बागपत और आसपास के इलाकों से आए लगभग 100 से अधिक किसानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित किसान महापंचायत में हिस्सा लेने के लिए मार्च शुरू किया था।
किसान प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) का विरोध कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि इस डील से देशी कृषि बाज़ार पर विदेशी कृषि उत्पादों का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे भारतीय किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। जब गाजियाबाद पुलिस ने इन किसानों को एक्सप्रेसवे पर रोका, तो वे वहीं सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। हालांकि, करीब 15 मिनट की मशक्कत के बाद पुलिस ने रास्ता खाली कराया और किसानों को वापस लौटा दिया।
एसीपी सूर्यबली मौर्य के अनुसार: "कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीन थानों की फोर्स तैनात की गई है। दिल्ली पुलिस भी अपनी सीमा में चेकिंग कर रही है। किसानों को समझा-बुझाकर वापस भेज दिया गया है।"
पुलिस की इस मुस्तैदी का सबसे बड़ा खामियाजा उन निर्दोष मुसाफिरों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका इस विरोध प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था।
घंटों की देरी: सामान्य दिनों में बॉर्डर पार करने में जहां 5 से 10 मिनट लगते हैं, वहीं आज लोगों को 45 मिनट से लेकर 1 घंटे से अधिक का समय लगा।
दिल्ली की सीमाओं पर जब-जब किसानों का आंदोलन या महापंचायत का आह्वान होता है, तब-तब राष्ट्रीय राजधानी की रफ्तार थम जाती है।
| कारण | प्रभाव |
| सीजेपी (CJP) प्रदर्शन व किसान महापंचायत | जंतर-मंतर पर जुटने की योजना के चलते पुलिस अलर्ट |
| सघन वाहन जांच | दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और आनंद विहार बॉर्डर पर रेंगते वाहन |
| व्यापारिक चिंताएं | प्रस्तावित बहुपक्षीय ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र में असुरक्षा |
Updated on:
21 Jul 2026 03:43 pm
Published on:
21 Jul 2026 03:31 pm
