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किसानों ने घेरा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, वेब सिटी और सनसिटी बिल्डर के खिलाफ खोला मोर्चा

वेब सिटी और सनसिटी के नाम से एनएच हाईवे-9 पर बसाई गई स्मार्ट सिटी के प्रभावित किसानों ने बिल्डरों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। 18 गांवों के किसानों ने सोमवार को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का घेराव किया है। किसानों का कहना है कि पुरानी दरों पर जमीन ली जा रही है। इसलिए अबके सर्किल रेट से मुआवजा तय किया जाए।

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गाजियाबाद. वेब सिटी और सनसिटी के नाम से एनएच हाईवे-9 पर बसाई गई स्मार्ट सिटी के प्रभावित किसानों ने बिल्डरों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। 18 गांवों के किसानों ने सोमवार को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का घेराव किया है। किसानों का कहना है कि 2005 में वेब सिटी और सनसिटी को बनाने की शुरुआत हुई थी और उस समय निर्धारित किए गए थे। दोनों बड़े बिल्डरों ने 200 रुपए गज से जमीन खरीदी। उन्होंने कहा कि उस समय किसानों को कोई ज्ञान नहीं था कि जमीन किस उपयोग में ली जा रही है। लेकिन, कुछ किसानों की जागरुकता के बाद जमीन देना बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से निर्धारित किए गए रेट ही अब तक भी चले आ रहे हैं। इसलिए फिलहाल के सर्कल रेट पर उनकी जमीन का मुआवजा तय किया जाए।

बम्हेटा गांव के किसान रूपन यादव ने बताया कि बिल्डरों ने 2008 में किसानों से 1860 रुपए प्रति वर्ग गज से जमीन लेने पर स्वीकृति दे दी थी। 2013 में 4 गांव कचैड़ा, दुजाना, दुरई, हाथीपुरा खेड़ा के किसानों से समझौता हुआ। इसके बाद 2014 में बम्हेटा, इकला, इनायतपुर, आरिकपुर, महरौली, काजीपुरा, बयाना, नायफल अमित समेत 18 गांव के किसानों से त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। लेकिन, अब तक भी कोई हल नहीं निकला है। रूपन यादव ने बताया कि जिन गांवों की जमीन ली गई है, उन गांवों का भी अभी तक कोई विकास नहीं हो पाया है। जबकि जमीन लेते वक्त किसानों से कहा गया था कि कॉलोनी बसाने के साथ-साथ गांव का भी चहुमुखी विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यहां के गांवों के किसानों की जमीन इन बिल्डर के द्वारा ली जा रही है। उससे यहां के किसान अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इसी बात को लेकर बड़ी संख्या में किसानों को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का घेराव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

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प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि कुछ गांवों की जमीन बिल्डरों के द्वारा जबरन ली गई है और उन्हें 5 प्रतिशत के प्लॉट भी नहीं आवंटित किए गए हैं। इसलिए जिन गांवों की जमीन ली गई है, उन्हें जमीन वापस की जाए और 5 प्रतिशत के प्लॉट भी आवंटित किए जाएं।

किसानों का कहना है कि सनसिटी और वेब सिटी की जमीन के रेट बिल्डरों के द्वारा 18,60,000 प्रति बीघा के हिसाब से तय किए हुए थे। यह रेट 2008 में निर्धारित किए गए थे, तभी से यही रेट चले आ रहे हैं। इसलिए फिलहाल के सर्कल रेट पर उनकी जमीन का मुआवजा तय किया जाए। इन सब मुद्दों समेत किसानों ने कुल सात मांगों को लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का घेराव किया और वीसी को एक ज्ञापन भी सौंपा है।

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