
गाजियाबाद. बेटियां हमेशा परिवार के बारे में सोचती हैं, लेकिन समाज की सोच आज भी कुंठित है इसकी वजह से हमेशा उन्हें उपेक्षा और धिक्कार का दंश झेलना पड़ता है। दिल्ली एनसीआर से सटा गाजियाबाद कहने के लिए प्रदेश में नए आयाम स्थापित कर रहा है, लेकिन लिंगानुपात के मामले में जो आंकड़ा सामने आया है। वह जनपद के लिए किसी दाग से कम नहीं है।
सेंट्रल एजेंसी नेशनल फैमिली हेल्थ (एनएफएचएस) की तरफ से किए गए सर्वे के मुताबिक यहां बेटियों की गर्भ में हत्या की जा रही है। बच्चे के जन्म से पहले अभी भी परीक्षण का खेल जारी है। इसकी बदौलत अब शहर में एक हजार लड़कों पर मात्र 888 लड़कियों रह गई हैं। सर्वे यह भी इशारा करता है कि गांव के मुकाबले शहर के लोग ऐसे घिनौने काम को अधिक बढ़ावा दे रहे हैं।
लिंगानुपात के मामले में गांव के लोग अधिक समझदार
प्रदेशभर के जिलों के सर्वें के बाद जारी हुए आंकड़ों को यदि उठाकर देखा जाए तो जिले में एक हजार लडकों पर लड़कियों की संख्या 899 है। इसमें भी शहरी क्षेत्र में ये संख्या 888 तथा ग्रामीण क्षेत्र में 926 है। जानकार बताते हैं कि ये स्थिति कन्या को जन्म दिए जाने से पहले ही उसे मार दिए जाने का नतीजा है। इसे जिले के अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले आठ साल के आंकड़े देखे जाएं तो अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर औचक निरीक्षण की कार्रवाई शून्य है।
287 अल्ट्रासाउंड सेंट्ररों के पास है मंजूरी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर यदि गौर किया जाए तो जिलेभर में 287 अल्ट्रासाउंड केंद्रों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में सचल अल्ट्रासाउंड केंद्र व्यवस्थित तरह से संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के संचालक एक काॅल पर मशीन लेकर सेवा के लिए उपलब्ध रहते हैं। जिनके द्वारा बाकायदा पड़ताल की जाती है और लगे हाथों रिपोर्ट भी जारी कर दी जाती है।
सही तरीके से नहीं की जाती पड़ताल
कारोबार के बढ़ने की वजह यह भी है कि विभाग और जिला प्रशासन के द्वारा अभी इस दिशा में किसी ऐसी एजेंसी का सहयोग नहीं लिया जा रहा है, जिसके माध्यम से यह खुलासा हो सके कि किस नर्सिंग होम अथवा अल्ट्रासाउंड केंद्र पर परीक्षण का खेल चल रहा है, जबकि जिले का खुफिया विभाग भी प्रशासन के अधीन है।
अभियान चलाकर बढ़ाएंगे जागरुकता
सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि एनएचएफ के सर्वे की रिपोर्ट से आंकड़ा स्पष्ट हुआ है। गाजियाबाद जनपद में बेटियों के प्रति समाज की धारणा को बदलने के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। जल्द ही अभियान चलाकर सभी जगहों पर जागरुकता बढ़ाई जाएगी। इसमें एनजीओ को भी शामिल किया जा जाएगा।
Published on:
23 Oct 2017 12:44 pm
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