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अधूरी रह गई हरीश राणा को लेकर मां-बाप की आखिरी इच्छा, डॉक्टरों की सलाह पर लेना पड़ा यह फैसला

गाजियाबाद के हरीश राणा का 13 साल कोमा में रहने के बाद एम्स दिल्ली में निधन हो गया।

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डॉक्टरों की सलाह ने बदल दी हरीश राणा की अंतिम यात्रा

डॉक्टरों की सलाह ने बदल दी हरीश राणा की अंतिम यात्रा

Harish Rana Euthanasia Case Latest Update: अ गाजियाबाद के हरीश राणा 13 साल तक कोमा में रहने के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। उनके मां-बाप ने लंबे समय से बेटे की देखभाल की थी। जब हरीश को एम्स ले जाने का समय आया, तब परिवार ने सोचा था कि बेटे की अंतिम यात्रा पूरी शान से गाजियाबाद में ही निकालेंगे। वे चाहते थे कि हिंडन घाट के श्मशान घाट पर ही हरीश का अंतिम संस्कार हो। यह उनकी आखिरी इच्छा थी, जो अब अधूरी रह गई है।

परिवार की भावनाएं और योजना

हरीश के माता-पिता अशोक राणा और निर्मला देवी ने अपने बहादुर बेटे के लिए गाजियाबाद में अंतिम यात्रा निकालने की ठानी थी। वे चाहते थे कि पूरा इलाका उनके बेटे को श्रद्धांजलि दे सके। हिंडन घाट उनका अपना श्मशान घाट था, जहां वे शांति से अंतिम संस्कार करना चाहते थे। परिवार ने कहा था कि बेटे की यह अंतिम यात्रा गाजियाबाद की मिट्टी में ही पूरी होगी।
13 साल के लंबे संघर्ष के बाद जब सुप्रीम कोर्ट से पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति मिली, तब भी मां-बाप का मन गाजियाबाद में अंतिम विदाई का ही था। वे सोचते थे कि अपने घर के पास ही बेटे को अंतिम सम्मान देंगे। यह इच्छा उनके दिल में गहरी थी, क्योंकि हरीश गाजियाबाद के रहने वाले थे और पूरा परिवार वहीं बसा हुआ था।

डॉक्टरों की सलाह और मजबूरी का फैसला

लेकिन एम्स में हरीश की बॉडी मेडिकेटेड थी। लंबे समय तक इलाज चलने के कारण कुछ मेडिकल इश्यूज भी सामने आए। डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि ऐसी स्थिति में लंबी दूरी तय करके शव को गाजियाबाद ले जाना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि दिल्ली में ही अंतिम संस्कार कर दिया जाए। परिवार ने बहुत सोचा-विचारा। मां-बाप की आंखों में आंसू थे, लेकिन डॉक्टरों की बात को मानना पड़ा। आखिरकार उन्होंने दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। यह फैसला उनके लिए बहुत मुश्किल था, क्योंकि इससे उनकी आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो पाई। वे चाहते थे कि बेटे की अंतिम यात्रा घर के पास हो, लेकिन मेडिकल कारणों ने सब बदल दिया।

शाम 4 बजे ली अंतिम सांसें

हरीश राणा की मौत शाम 4 बजे हुई। हरीश पिछले 13 साल से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद हरीश राणा और उनका परिवार पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। आज पूरा देश हरीश राणा की आत्मा की शांती की दुआ और प्राथना कर रहा है। 13 साल से मौत से लड़ रहे हरीश भले ही आज दुनिया को छोड़ दिए, लेकिन उनकी कहानी सालों तक देश के लोग याद करेंगे। हरीश राणा पहले ऐसे व्यक्ति बने, जिन्हें भारत में इच्छामृत्यु की अनुमति मिली हो।

एक मां-बाप की बेबसी

चार साल पहले परिवार ने दिल्ली का घर बेचकर गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसायटी में शिफ्ट हो गए। यहां उनके पिता अशोक राणा, माता निर्मला राणा और छोटे भाई आशीष लगातार 13 साल से उनकी देखभाल कर रहे थे। पूरा परिवार हरीश की सेवा में जुटा रहा।

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