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पार्षद प्रत्याशी ने किया गुमराह, नामांकन के दौरान दायर किया फर्जी हलफनामा

निर्दलीय प्रत्याशी ने नामांकन के दौरान फर्जी हलफनामा दायर किया है।

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independent candidate filed false Affidavit in nomination

गाजियाबाद। निकाय चुनाव में मेयर और पार्षद प्रत्याशी शहर के विकास की बात कर चुनावी दंगल में आते हैं। दंगल के शुरुआती कदम पर सभी को अपना हलफनामा देकर जनता और आयोग को अपनी वास्तविकता के बारे में बताना पड़ता है। लेकिन, यहां प्रत्याशी आम जनता से पहले आयोग को गुमराह कर रहे हैं तो ऐसे दावेदार चुनाव जीतने के बाद जनता के भविष्य के साथ किस तरह खिलवाड़ करेंगे ये अपने आप में सोचने वाली बात है। जी हां, आनंद विहार और दिल्ली से सटे वार्ड -94 सूर्यनगर से निर्दलीय प्रत्याशी अजय सिंह पार्षद प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी पेश कर रहे है। नामाकंन किए जाने के दौरान चुनाव आयोग के सामने उन्होंने जो हलफनामा जमा किया गया है, उसमे बताया गया है कि अचल संपत्ति के तौर पर सिर्फ उनके पास एक घर दिखाया। इसकी बाजारी कीमत 3 करोड़ रुपये है। वहीं, घर पर 2,07,25,434 रुपये का कर्जा इंडिया बुल्स से है।

साहिबाबाद औद्योगिक एरिया में है दो प्लॉट

जबकि, हकीकत में कागजों में अजय सिंह और उनकी पत्नी के नाम पर साहिबाबाद साईट-4 में 2 औद्योगिक प्लाट है। जिनके प्लॉट संख्या 28/1/05 और 28/1/06 हैं। कुल एरिया 1816.25 वर्ग मीटर है, इन प्लाटों पर ऐस फैब ओवरसीज के नाम पर एक थ्री-स्टार होटल है। इस पर कॉरपोरेशन बैंक, प्रीत विहार का 9,39,27,943.50 रुपए ब्याज अन्य शुल्क का 1 अक्टूबर 2016 से बकाया है। उनके प्रीत विहार के बैंक का खाता नम्बर 053200201999952 है और बैंक ने इस सम्पत्ति को 15.09.2017 को ई-ऑक्शन के लिये लगाया था, लेकिन वो ऑक्शन नहीं हुई।

अचल सम्पत्ति और अपराधिक केसों पर डाला पर्दा

नामकंन के दौरान दिए जाने वाले घोषणा पत्र में चल अचल सम्पत्ति, अपराधिक मामलों व लोन के बारे में जानकारी देनी होती है। लेकिन, यहां अंचल सम्पत्ति के साथ में अपराधिक मामलों को भी छुपाया गया। चंद्रनगर क्लब में 2 जवान लड़कों की मौत के मामले में भी इन पर एफआईआर दर्ज है। जिस पर सेटलमेंट करके एफआईआर लगवाने की कोशिश की गई, जो कोर्ट में लंबित है। इसका जिक्र भी घोषणा पत्र में उन्होंने नहीं किया है।

चन्दनगर क्लब को लेकर खड़े हैं सवाल

सन 2006 से चन्द्रनगर क्लब पर जबसे इन्होंने कब्जा किया, क्लब के चुनाव नहीं करवाए गए। डिप्टी रजिस्ट्रार मेरठ द्वारा 2014 में चुनाव के लिये आदेश पारित किये गये थे और चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया था। लेकिन, सपा सरकार से सेटिंग के पर वह चुनाव नहीं करवाया गया।

अधिकारी का कहना है ये


जिलाधिकारी रितू माहेश्वरी के मुताबिक, दिए गए हलफनामे की सत्यता की जांच की जाएगी। अगर इसमें गड़बड़ी मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।