
गाजियाबाद. वैश्विक महामारी कोविड-19 ( Covid-19 ) के चलते सरकार ने इस बार कांवड़ यात्रा ( Kanwar Yatra ) स्थगित करने की घोषणा कर दी है। इस कारण जहां एक तरफ शिव भक्त परेशान हैं तो वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान सामान बेचने वाले और कपड़े बेचने वाले, टेंट कारोबारियों पर भी दोहरी मार पड़ी है। क्योंकि लॉकडाउन ( Lockdown ) के बाद से इन लोगों के पास काम नहीं है, ऊपर से कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी गई है। खासतौर से कांवड़ यात्रा को लेकर कपड़ा बेचने वाले लोगों ने पहले से ही स्टॉक तैयार किया हुआ है, लेकिन अब उनके सामने भी आर्थिक संकट ( Economic Crisis ) खड़ा हो गया है।
उल्लेखनीय है कि कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड की सरकार ने कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी है, जिसके बाद से शिव भक्त इस बार बेहद निराश हैं। वहीं, इसका असर टेंट के कारोबार और कांवड़ यात्रा के दौरान भगवा कपड़े बेचने वाले दुकानदारों पर भी पड़ा है। इन लोगों का कहना है कि इस दौरान उनकी अच्छी बिक्री होती है, जिससे उनके परिवार का लालन-पालन ठीक से हो पाता है।
काम धंधे की आखिरी उम्मीद भी हुई खत्म
कांवड़ मेले के दौरान सड़क किनारे अपनी दुकान लगाकर भगवा कपड़ों की बिक्री करने वाले अकरम और दान सिंह ने बताया कि जबसे उन्होंने यह सुना है कि इस बार कांवड़ यात्रा /मेला स्थगित कर दिया गया है। तभी से उनके और उनके परिवार वाले बेहद परेशान हैं। क्योंकि कांवड़ यात्रा को लेकर हर साल वह पहले से ही अपना स्टॉक तैयार रखते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद ब्याज पर पैसे लेकर कांवड़ मेले के लिए भगवा कपड़ों का स्टॉक खरीदा है, लेकिन वह इस बार नहीं बेच पाएंगे। उनका कहना हैै कि हमारे जैसे और भी न जाने कितने लोग परेशान हैं, जिन्हें यह दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। क्योंकि एक तरफ उन्हें पैसे का ब्याज देना पड़ रहा है तो वहीं माल भी नहीं बिक रहा है।
टेंट व्यापारी भुखमरी की कगार पर
वहीं, गाजियाबाद टेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुखविंदर सिंह ने बताया कि 2020 में टेंट का कारोबार बंदी की कगार पर आ गया है। क्योंकि पहले लॉकडाउन चलता रहा। फिर कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए शादी समारोह पर भी पाबंदी लगा दी गई और अब उन्हें अपना धंधा चलने की कुछ उम्मीद सावन के महीने में कांवड़ के मेले के दौरान होती है, लेकिन कांवड़ यात्रा मेला स्थगित किए जाने के बाद अब यह उम्मीद भी खत्म हो चुकी है। उन्होंने बताया कि टेंट कारोबारियों को गोदाम का किराया, टेंट की धुलाई और कर्मचारियों का वेतन देने के साथ-साथ अपना परिवार चलाना भी भारी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह से टेंट व्यापारी भी भुखमरी की कगार पर आ चुके हैं।
Published on:
04 Jul 2020 10:11 am
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