शहर में एफओबी बनाने का कांट्रेक्ट ऐसी फर्मों के पास हैं, जिनकी पहुंच लखनऊ तक है। अधिकतर फर्मों ने एफओबी तो बना दिए हैं, लेकिन इनमें न तो लिफ्ट लगाई, न ही एस्केलेटर। निगम ने इन एफओबी को कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी नहीं दिए हैं। इससे पहले ही इन पर विज्ञापन लगाकर कमाई शुरू कर दी गई है। निगम जब कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करेगा, इनकी कांट्रेक्ट की अवधि भी तभी से शुरू होगी। ऐसे में निगम को करोड़ों रुपए सलाना का घाटा झेलना पड़ रहा है। बीते दिनों नगर निगम सदन ने अधूरे एफओबी से विज्ञापन हटाने का प्रस्ताव पास किया था। निगम ने कई एफओबी से विज्ञापन हटा दिए थे। इसकी पर कांट्रेक्टरों ने आकाओं से शिकायत की। निगम सूत्रों की मानें तो यूपी के कद्दावर मंत्री का फोन निगम के एक सीनियर अधिकारी के पास आसा और विज्ञापन न हटाने की हिदायत दी। चंद दिनों बाद ही एफओबी पर फिर से विज्ञापन लग गए।