
वीसी कार्यालय में तोड़फोड़ और मोबाइल गायब होने का आरोप, चौक कोतवाली में तहरीर (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ( KGMU) में शुक्रवार को हुए बवाल ने प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद केजीएमयू प्रशासन ने चौक कोतवाली में लिखित तहरीर देकर कुलपति कार्यालय में तोड़फोड़, मोबाइल फोन गायब होने और कानूनी कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। यह तहरीर केजीएमयू के चीफ प्रॉक्टर आर.ए.एस. कुशवाहा की ओर से दी गई है, जिसमें महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की मौजूदगी में हुई अराजकता का विस्तृत विवरण दर्ज कराया गया है।
चौक कोतवाली में दी गई तहरीर के अनुसार, महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के केजीएमयू पहुंचने से पहले ही कुलपति कार्यालय के बाहर सैकड़ों अज्ञात लोग एकत्र हो गए थे। इन लोगों की पहचान स्पष्ट नहीं थी और न ही वे विश्वविद्यालय से जुड़े कर्मचारी या छात्र बताए जा रहे हैं। तहरीर में उल्लेख है कि जैसे ही अपर्णा यादव की गाड़ी वहां पहुंची और वह वाहन से उतरीं, उसी समय भीड़ ने कुलपति के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए आगे बढ़ना शुरू कर दिया।
तहरीर के मुताबिक, जब सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया, तो उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। हालात तेजी से बिगड़ते चले गए। भीड़ के हिंसक होते ही परिसर में मौजूद शिक्षक और छात्र दहशत में इधर-उधर भागने लगे।स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि विश्वविद्यालय परिसर में कुछ देर के लिए अराजकता का माहौल बन गया।
प्रशासन की तहरीर में यह भी कहा गया है कि उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के साथ मौजूद भीड़ जबरन कुलपति कार्यालय में घुस गई। इसके बाद कार्यालय में तोड़फोड़ शुरू हो गई। फर्नीचर और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया गया। हालात को काबू से बाहर जाता देख कुलपति को सुरक्षा के मद्देनजर दूसरे गेट से बाहर निकालना पड़ा।
तहरीर में सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि हंगामा और तोड़फोड़ के दौरान कुलपति का मोबाइल फोन गायब हो गया। प्रशासन ने इसे विश्वविद्यालय की संपत्ति और व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। इस बिंदु को लेकर पुलिस से निष्पक्ष जांच और दोषियों की पहचान की मांग की गई है।
तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस समय यह पूरा घटनाक्रम हो रहा था, उसी समय राज्यपाल के निर्देश पर शिक्षकों के प्रमोशन से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक कुलपति कार्यालय में चल रही थी। प्रशासन का कहना है कि इस हंगामे के कारण न केवल विश्वविद्यालय का शैक्षणिक और प्रशासनिक काम बाधित हुआ, बल्कि राज्यपाल के निर्देशों की अवहेलना जैसी स्थिति भी उत्पन्न हुई।
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल महिला आयोग और उसके पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर उठ रहा है। महिला आयोग जैसी संवैधानिक संस्था का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना है, लेकिन केजीएमयू प्रशासन की तहरीर में दर्ज घटनाक्रम ने आयोग की भूमिका पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
प्रशासनिक हलकों में यह सवाल पूछा जा रहा है कि महिला आयोग की उपाध्यक्ष की मौजूदगी में भीड़ इस तरह हिंसक कैसे हो गई। क्या आयोग के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं थी कि वे स्थिति को शांत रखते। क्या किसी संवैधानिक पदाधिकारी की उपस्थिति में कानून व्यवस्था भंग होना स्वीकार्य है।
तहरीर के बाद यह सवाल भी सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है कि महिला आयोग है या अराजक तत्वों का जमावड़ा। हालांकि, इस सवाल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और साख पर भी असर डालती हैं।
घटना को लेकर यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं इसके पीछे राजनीतिक या व्यक्तिगत हित तो नहीं जुड़े हुए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, भीड़ में शामिल कई लोग विश्वविद्यालय से सीधे तौर पर जुड़े नहीं थे, जिससे सवाल और गहरे हो जाते हैं। पुलिस अब यह जांच करेगी कि भीड़ किन लोगों की थी, उन्हें किसने बुलाया और उनका उद्देश्य क्या था
चौक कोतवाली में दर्ज तहरीर के बाद अब पूरा मामला पुलिस जांच के दायरे में आ गया है। पुलिस से अपेक्षा की जा रही है कि वह अज्ञात भीड़ की पहचान करें। तोड़फोड़ और मोबाइल गायब होने की सच्चाई सामने लाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे। यह भी देखा जाएगा कि क्या इस मामले में कानूनी कार्य में बाधा और सरकारी संपत्ति को नुकसान जैसी धाराएं लगाई जाती हैं।
Updated on:
10 Jan 2026 12:58 am
Published on:
10 Jan 2026 03:00 am
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