। यूपी के एक मंत्री नगर निगम बोर्ड के फैसले पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। नगर निगम बोर्ड ने अधूरे एफओबी पर लगाए विज्ञापन हटाने का प्रस्ताव पास किया था। विज्ञापन हटे तो मंत्री का फोन बज उठा। मामला यूपी के एक कद्दावर मंत्री का था तो अफसर भी मौन हो गए। अब दोबारा से अधूरे एफओबी पर विज्ञापन लग गए हैं। दुविधा में अब निगम के अफसर भी हैं एक तरफ मंत्री है तो दूसरी तरफ निगम सदन और मेयर।
शहर में एफओबी बनाने का कांट्रेक्ट ऐसी फर्मों के पास हैं, जिनकी पहुंच लखनऊ तक है। अधिकतर फर्मों ने एफओबी तो बना दिए हैं, लेकिन इनमें न तो लिफ्ट लगाई, न ही एस्केलेटर। निगम ने इन एफओबी को कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी नहीं दिए हैं। इससे पहले ही इन पर विज्ञापन लगाकर कमाई शुरू कर दी गई है। निगम जब कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करेगा, इनकी कांट्रेक्ट की अवधि भी तभी से शुरू होगी। ऐसे में निगम को करोड़ों रुपए सलाना का घाटा झेलना पड़ रहा है। बीते दिनों नगर निगम सदन ने अधूरे एफओबी से विज्ञापन हटाने का प्रस्ताव पास किया था। निगम ने कई एफओबी से विज्ञापन हटा दिए थे। इसकी पर कांट्रेक्टरों ने आकाओं से शिकायत की। निगम सूत्रों की मानें तो यूपी के कद्दावर मंत्री का फोन निगम के एक सीनियर अधिकारी के पास आसा और विज्ञापन न हटाने की हिदायत दी। चंद दिनों बाद ही एफओबी पर फिर से विज्ञापन लग गए।
महापौर, अशु वर्मा ने कहा कि निगम सदन से ऊपर न तो कोई मंत्री है, न अधिकारी। बृहस्पतिवार को निगम अधिकारियों से वार्ता कर रिपोर्ट ली जाएगी। बिना कंप्लीशन के एफओबी पर विज्ञापन नहीं लगने दिए जाएंगे।
वहीं, अपर नगर आयुक्त व बीओटी प्रभारी डीके सिंहा ने कहा कि अवैध विज्ञापन हटाने की कार्रवाई समय-समय पर की जाती है। दोबारा एफओबी पर विज्ञापन लगने की जानकारी नहीं है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।