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संगीत सोम के बाद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता को हुआ Swine flu, 71 मरीजों की पुष्टि, 2 की मौत

सरकारी आंकड़ों की बात करें तो अब तक जनपद के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कुल 71 मरीजों को स्वाईन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है

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sangeet som

गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में स्वाईन फ्लू का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। यदि सरकारी आंकड़ों की बात करें तो अब तक जनपद के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कुल 71 मरीजों को स्वाईन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 2 मरीजों को मौत भी हो गयी है। गाजियाबाद के कौशाम्बी स्थित यशोदा अस्पताल में एक भाजपा नेता संगीत सोम को पिछले हफ्ते स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। जिनका सफल इलाज हुआ और उनके स्वस्थ होने उन्हें छुट्टी दे दी गयी। अब कांग्रेस के नेता पीएल पुनिया को भी स्वाईन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। उनका इलाज भी उसी यशोदा अस्पताल में ही चल रहा है। सीएमओ के मुताबिक अब उन्हें काफी आराम है।

स्वाइन फ्लू का प्रकोप आजकल जोरो पर है। गाजियाबाद में सीएमओ डॉक्टर नरेंद्र गुप्ता के अनुसार अब तक जिले में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कुल 71 मरीजों को स्वाइन स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से कुल 41 मरीज प्राइवेट अस्पतालों के मरीजों को (एच 1 एन1) यानी स्वाइन स्वाइन फ्लू पॉजिटिव आया है। जबकि 30 सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को स्वाइन स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनंमे से प्राइवेट अस्पताल के 2 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। सीएमओ ने बताया कि इन मरीजों में एक मरीज भाजपा का नेता और दूसरा मरीज कांग्रेस का नेता भी शामिल हैं। इनमें से एक स्वस्थ हो गए, जबकि दूसरे मरीज का इलाज चक रहा है। उन्हें भी काफी आराम है। उम्मीद है कि जल्द ही वो भी स्वस्थ हो जाएंगे। वहीं सीएमओ नरेंद्र कुमार गुप्ता ने दोनों नेताओं का नाम बताने से इंकार कर दिया।

वहीं हमने इस बात की पड़ताल भी करनी चाही कि आखिरकार कोई अधिकारी या नेता सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए क्यों नहीं आते। जो कि यह बड़ा सवाल है। इस सवाल का जवाब देते हुए सीएमओ ने बताया कि एक सबसे बड़ा कारण तो यह है कि सरकारी अस्पताल में अभी पूर्णतया सुविधाओं का अभाव है। जैसे वेंटिलेटर आदि की सुविधा अभी यहां नहीं है। दूसरा कारण यह भी है कि कुछ लोग सरकारी अस्पताल में इलाज कराने को स्टेटस सिंबल भी मानते हैं। जिसकी वजह से सरकारी अस्पताल में इलाज कराने से बचते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं जो इलाज के लिए पहले सरकारी अस्पताल ही आते हैं।

बहरहाल यह बड़ी बात है कि जनपद गाजियाबाद दिल्ली से सटा हुआ है। यहां सरकारी अस्पताल बहुत पुराना भी है और यहां जनसंख्या भी काफी है। बावजूद उसके यहां अभी तक सरकारी अस्पताल में पूरी सुविधाएं नहीं हैं। जो कि सोचने वाली बात है। यदि यहां पूरी सुविधाएं नही होंगी तो गरीब कैसे अपना इलाज करा सकता है।

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