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गाजियाबाद एनकाउंटर के हीरो की मुश्किलें बढ़ीं, जांच रिपोर्ट में खुलासा- बगैर गोली मारे भी हो सकती थी गिरफ्तारी

Ghaziabad Encounter : 11 नवंबर को सात पशु तस्करों के एनकाउंटर की जांच में क्षेत्राधिकारी ने चौंकाने वाले सवाल खड़े किए हैं। क्षेत्राधिकारी की रिपोर्ट तत्कालीन एसएचओ राजेंद्र त्यागी के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, तमाम ऐसे बिंदु सामने आए हैं, जो एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। रिपोर्ट का सबसे बड़ा बिंदु यह है कि जब गोली मारे बगैर ही पशु तस्करों की गिरफ्तारी की जा सकती थी तो फिर सभी सातों लोगों को गोली क्यों मारी गई?

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गाजियाबाद. लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में 11 नवंबर को सात पशु तस्करों के एनकाउंटर की जांच में क्षेत्राधिकारी ने चौंकाने वाले सवाल खड़े किए हैं। क्षेत्राधिकारी की रिपोर्ट तत्कालीन एसएचओ राजेंद्र त्यागी के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, तमाम ऐसे बिंदु सामने आए हैं, जो एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। रिपोर्ट का सबसे बड़ा बिंदु यह है कि जब गोली मारे बगैर ही पशु तस्करों की गिरफ्तारी की जा सकती थी तो फिर सभी सातों लोगों को गोली क्यों मारी गई? बहरहाल गाजियाबाद एसएसपी क्षेत्राधिकारी की रिपोर्ट का अवलोकन कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि 'पत्रिका' ने छठ पर्व के दिन लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में हुए एनकाउंटर पर लगातार प्रमुखता से खबरें प्रकाशित करते हुए सवाल उठाए थे। पत्रिका की मुहिम का ही नतीजा है कि एक नाबालिग को जेल से बाल सुधार भेजने की कवायद की गई। बता दें कि पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किए गए सातों आरोपियों की तरफ से पहले पुलिस पार्टी पर फायरिंग की गई थी। इसके बाद पुलिस ने अपना बचाव करते हुए फायरिंग की और सातों आरोपियों को गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया गया।

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एसएसपी ने गोपनीय सूचना वायरल करने पर किया था निलंबित

आश्चर्य की बात ये है कि सभी सातों आरोपियों को एक ही जगह पर पैर में गोली लगी। इसके बाद मुठभेड़ पर तमाम तरह के सवाल खड़े हो गए। इसके बाद तत्कालीन एसएचओ राजेंद्र त्यागी को सम्मानित करने के स्थान पर ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। इतना ही नहीं उन्होंने तस्करा में लिख दिया कि उन्हें नौकरी की जरूरत नहीं है। क्योंकि इतना बड़ा गुड वर्क करने के बाद भी उन्हें सजा के तौर पर दूसरी जगह भेजा जा रहा है। इससे वह बेहद आहत हैं। पुलिस के गोपनीय दस्तावेज जीडी लीक हो गई और सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गई। इसके बाद पुलिस की गोपनीय सूचना सोशल मीडिया पर वायरल करने का दोषी मानते हुए एसएसपी ने राजेंद्र त्यागी को निलंबित कर दिया।

जब सभी आरोपी गोदाम के अंदर थे तो बगैर गोली मारे क्यों नहीं पकड़ा?

निलंबन के 14 दिन तक भी इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी ने ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। सवाल उठे तो इंस्पेक्टर ने पुलिस लाइन में आमद करा दी। उधर, एसएसपी ने क्षेत्राधिकारी रजनीश उपाध्याय को एनकाउंटर की जांच सौंप दी।बहरहाल अब क्षेत्राधिकारी रजनीश उपाध्याय ने जांच के बाद रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी है। रिपोर्ट में तमाम बिंदु है, जिनके आधार पर पुलिस और पशु तस्करों के बीच हुई मुठभेड़ पर तमाम तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। उसमें एक अहम बिंदु है कि जिस वक्त पशु तस्करों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हो रही थी और वह गोदाम के अंदर ही मौजूद थे। तब पुलिस सभी सातों आरोपियों को बगैर गोली मारे गिरफ्तार कर सकती थी। इसके अलावा इनमें एक नाबालिग भी शामिल था। जबकि पुलिस ने उसे भी बालिग बताते हुए सलाखों के पीछे भेज दिया। हालांकि एसएसपी पवन कुमार ने बाद में नाबालिग को बाल सुधार गृह भिजवा दिया था। फिलहाल एसएसपी क्षेत्राधिकारी की जांच रिपोर्ट का अवलोकन कर रहे हैं।

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