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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के इस न्यायधीश से छीना न्यायिक कार्यभार, ट्रेनिंग पर भेजा, ये थी वजह

Suprime Court: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी एक जज से न्यायिक अधिकार छीना साथ ट्रेनिंग के लिए भेजने का आदेश दिया है।

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Suprime Court

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उत्तर प्रदेश के एक सत्र न्यायाधीश को आरोपियों को बले नहीं देना महंगा पड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार यानी 2 मई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से एक सत्र न्यायाधीश के न्यायिक अधिकार को वापस लेने का निर्देश दिया है। इसके साथ उन्हें ट्रेनिंग के लिए भेजने को भी कहा है। आपको बता दें कि न्यायमूर्ती संजय किशन कौल और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ को बताया गया था कि सत्र न्यायाधीश निर्देशों का पलन नहीं कर रहे हैं। वहीं शीर्ष ने हाई कोर्ट से इस मामले में 1 महीने के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है। उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से संबंधित न्यायाधीश एक न्यायिक अकादमी में अपने कौशल के उन्नयन के लिए मापदंडों को पूरा करते हैं और आवश्यक उच्च न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए।"

वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दो मामले किए थे पेश
अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दो ऐसे केस अदालत के समक्ष पेश किए थे, जिसमें आरोपियों के बेल के आदेश नहीं दिए गए थे। शादी से जुड़े विवाद के केस में लखनऊ के सत्र न्यायाधीश ने आरोपी, उसकी मां, पिता और भाई को बेल नहीं दिये थे, जबकि उनको अरेस्ट भी नहीं किया गया है। वहीं, दूसरे केस में एक आरोपी कैंसर पीड़ित था, इसके बाद भी गाजियाबाद की स्पेशल कोर्ट ने उसे बेल देने से मना कर दिया था। पीठ ने निराशा जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे बहुत से आदेश दिए जा रहे हैं, जो हमारे आदेशों से बिल्कुल उलट है। अदालत में कानून के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं। 10 माह पूर्व फैसला देने के बाद भी इसका अनुपालन नहीं किया गया।

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