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घर में शौचालय नहीं होने पर महिला ने छोड़ा पति का घर, बोली- मैं ससुराल नहीं जाऊंगी, जानें फिर क्या हुआ

गाजियाबाद (Ghaziabad) की एक बेटी ने घर में शौचालय नहीं (Lack of toilet) होने पर ससुराल जाने से इनकार कर दिया है। साथ ही ये शर्त रखी है कि जब तक शौचालय का निर्माण नहीं होता, वह ससुराल नहीं जाएगी। काउंसलिंग के दौरान पति ने वादा किया है कि वह घर में शौचालय का निर्माण कराएगा। इसके लिए उसने 15 दिन का वक्त मांगा है।

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घर में शौचालय नहीं होने पर महिला ने छोड़ा पति का घर, बोली- मैं ससुराल नहीं जाऊंगी।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र और राज्य सरकार खुले में शौच से मुक्ति के लिए गांव-गांव में घर-घर शौचालय बनवा रही है। इस योजना के तहत सरकार पूरे देश को ओडीएफ (ODF) करना चाहती है। लेकिन, अभी तक कितने ही ऐसी घर हैं, जहां शौचालय नहीं हैं और महिलाओं को खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला महिला एवं बाल कल्याण विभाग के वन स्टॉप सेंटर में सामने आया है। गाजियाबाद (Ghaziabad) की एक बेटी ने घर में शौचालय नहीं होने पर ससुराल जाने से इनकार कर दिया है। साथ ही ये शर्त रखी है कि जब तक शौचालय का निर्माण नहीं होता, वह ससुराल नहीं जाएगी। काउंसलिंग के दौरान पति ने वादा किया है कि वह घर में शौचालय का निर्माण कराएगा। इसके लिए उसने 15 दिन की मियाद मांगी है। सेंटर प्रभारी निधि का कहना है कि महिला की शर्त पूरी होने के बाद ही उसे पति के साथ भेजा जाएगा।

दरअसल, गाजियाबाद के हिंडन विहार की रहने वाली एक बेटी का विवाह हाथरस के रहने वाले युवक के साथ हुआ था। लेकिन, कुछ साल बाद ही ननद और सास के झगड़े के चलते घर में कलह रहने लगी। वहीं, पति उनके सिखाए में आकर अक्सर गाली-गलौच और मारपीट करने लगा। पीड़िता का कहना है कि ससुराल में रोज-रोज के झगड़ों के कारण उसे ससुरालियों ने रहने के लिए अलग घर दिया है, लेकिन उसमें शौचालय नहीं है। इसलिए बाहर शौच के लिए जाना पड़ता तो वह गाजियाबाद अपने मायके आ गई। यहां उसने वन स्टॉप सेंटर में शिकायत की। पीड़िता ने कहा कि उसका पति अक्सर उसे प्रताड़ित करता है और बेटी को भी आगे नहीं पढ़ने दे रहा है।

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12वीं के बाद छुड़वाई बेटी की पढ़ाई

पीड़िता ने बताया कि पति ने उसकी बेटी की 12वीं के बाद की पढ़ाई छुड़वा दी है। इस पर वन स्टॉप सेंटर ने काउंसलिंग के लिए दोनों पक्षों को बुलाया। जहां पति ने कहा कि वह टेलर है। उसकी इतनी कमाई नहीं है कि वह सभी बच्चों को पढ़ा सके। उसने कहा कि बेटों की पढ़ाई जारी है, लेकिन वह बेटी को आगे पढ़ाना नहीं चाहता। इस पर सेंटर प्रभारी निधि ने सुझाव दिया कि वह अपनी बेटी का दाखिल सरकारी स्कूल में करवा सकते हैं। इसके लिए महिला एवं बाल कल्याण विभाग की तरफ से आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह सुनकर वह बेटी को आगे पढ़ाने के लिए राजी हो गया।

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बोला- घर शौचालय निर्माण भी मेरी जिम्मेदारी, निभाऊंगा

वहीं, पीड़िता की घर में शौचालय निर्माण की मांग को लेकर उसने सेंटर में कहा कि शौचालय निर्माण कराना भी उसकी जिम्मेदारी है। वह जल्द ही शौचालय का निर्माण कराएगा। इसके लिए उसे 15 दिन का समय दिया जाए। सेंटर प्रभारी निधि का कहना है कि काउंसलिंग की गई है। लगातार मामले में फॉलोअप भी किया जा रहा है। 15 दिन बाद फिर बुलाया गया है। महिला की सभी शर्त पूरी होते ही उसे पति के साथ भेज दिया जाएगा।