
File image
गाजीपुर: जिला अस्पताल की ओपीडी में एक मासूम की तड़प-तड़पकर उसके मां की गोद में ही जान चली गई। आरोप है कि ऑनलाइन पर्ची नहीं कटवा पाने के कारण और लंबी लाइन होने के कारण मासूम की मौत हुई है। इस घटना ने अस्पताल में मौजूद सभी को झकझोर कर रख दिया। सरकार के बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के दावे पर या घटना सवालिया निशान खड़ा कर रही है।
उल्टी और दस्त की थी शिकायत
घटना राजकीय मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध जिला अस्पताल के ओपीडी की है। आरोप है कि दिलदारनगर के महना गांव के रहने वाले सतीश कुमार अपने 4 माह के बच्चे को लेकर गाजीपुर के जिला अस्पताल पहुंचे थे। बच्चे को उल्टी और दस्त की शिकायत थी, साथ में उसकी मां भी मौजूद थी, लेकिन जिला अस्पताल की ओपीडी में ऑनलाइन पर्ची सिस्टम होने के कारण उन्हें तत्काल इलाज नहीं मिल पाया।
पर्ची के लिए करना पड़ा लंबा इंतजार
आरोप है कि बच्चे की स्थिति गंभीर थी और डॉक्टर से दिखाने के लिए पिता और बच्चे की मां अस्पताल के कर्मियों से मिन्नतें कीं, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। हारकर सतीश पर्ची कटाने पहुंचे तो वहां लंबी लाइन लगी हुई थी। काफी देर इंतजार करने के बाद जब पर्ची काटी तो वह डॉक्टर के पास पहुंचे लेकिन वहां भी उन्हें इंतजार करना पड़ा।
मौत के बाद बेसुध हुआ बच्चे का पिता
सतीश का जब नंबर आया तो वह अपने बच्चों को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टर ने बच्चों को देखते ही मृत घोषित कर दिया। अपने मृत बच्चों को गोद में लेकर उसकी मां वहीं बैठकर रोने लगी। पिता भी बेसुध हालत में नजर आए। इसके बाद वहां मौजूद आसपास के लोगों ने उन्हें सांत्वना दी। 2 साल पूर्व भी सतीश के एक बच्चे की उल्टी और दस्त से मौत हो चुकी है।
क्या बोले जिम्मेदार
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर आनंद मिश्रा ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने हुए अजीबोगरीब बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे की तबीयत इतनी खराब थी तो उसे ओपीडी में नहीं बल्कि इमरजेंसी में लेकर जाना चाहिए था। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में पर्ची कटवाने की व्यवस्था ऑनलाइन ही है और भीड़ अधिक होने का कारण देर हो गई।
Published on:
27 Feb 2026 08:23 am
बड़ी खबरें
View Allगाजीपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
