परिजनों ने बताया कि सरजू पांडेय का निधन 1989 में मॉस्को में हुआ था, जिसकी वजह से मृत्यु प्रमाण पत्र लाना संभव नहीं है। इसके बदले उन्होंने कचहरी में लगे उनके शिलापट्ट की तस्वीर और उस समय की अख़बार की कटिंग भी देने की पेशकश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। पूर्व सांसद सरजू पांडेय की मृत्यु एक ऐतिहासिक घटना थी। वर्ष 1989 में जब उनकी मॉस्को से शव यात्रा आई तो गाजीपुर में सबसे अधिक भीड़ उमड़ी थी।