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समाजवादी पार्टी के इस “रॉबिन हुड” पर हत्या से लेकर जबरन वसूली तक 65 केस हैं दर्ज

यूपी पुलिस ने लॉ एंड ऑर्डर के लिए प्रदेश के 68 मोस्ट वांटेड क्रिमिनल कुंडली तैयार की है। जिसमें वह लोग शामिल है जो गंभीर अपराध किए हैं। इस लिस्ट में मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उसका नाम हटा दिया गया। अतीक और अशरफ का नाम भी मौत के बाद हटाया गया था।

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समाजवादी पार्टी के इस

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गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी की मौत को लेकर विपक्ष उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना कर रहा है। अब इससे भी दो कदम आगे बांदा में दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत के एक दिन बाद समाजवादी पार्टी के विधायक महेंद्र नाथ यादव ने मुख्तार अंसारी को गरीबों का रॉबिनहुड करार दिया है।

सपा विधायक महेंद्र नाथ यादव ने शुक्रवार को कहा कि जितने भी लोग गरीबों की लड़ाई लड़ते हैं, गरीब के लिए आवाज उठाते हैं, पत्रकार उन्हें माफिया कहते हैं। सपा विधायक ने कहा कि 'मुख्तार अंसारी 5 बार का विधायक और गरीबों का रॉबिनहुड था। जेल में रहते हुए जनता ने उसको विधायक बनाया। मुख्तार अंसारी पूर्व विधायक और वहां के गरीबों के मसीहा हैं।'

सपा विधायक महेंद्र नाथ यादव ने उस मुख्तार अंसारी को गरीबों का रॉबिनहुड बताया है। जिसे कोर्ट दो बार उम्रकैद की सजा सुना चुका है। साल 2005 से जेल में रहते हुए उसके खिलाफ हत्या और गैंगस्टर अधिनियम के तहत 28 मामले दर्ज थे और सितंबर, 2022 से 8 आपराधिक मामलों में उसे दोषी ठहराया गया था। फिलहाल मुख्तार फिलहाल मुख्तार अंसारी पर अलग-अलग अदालतों में 21 मुकदमे चल रहे थे। करीब 37 साल पहले धोखाधड़ी से हथियार लाइसेंस प्राप्त करने के एक मामले में इस महीने की शुरुआत में वाराणसी की MP/MLA कोर्ट ने मुख्तार को उम्रकैद और 2.02 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

इससे पहले 5 जून, 2023 को वाराणसी की एक MP/MLA कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस विधायक और वर्तमान उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की हत्या के मामले में मुख्तार अंसारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 3 अगस्त, 1991 को जब अवधेश और उनके भाई अजय वाराणसी के लहुराबीर इलाके में अपने घर के बाहर खड़े थे, तब अवधेश राय को गोलियों से भून दिया गया था।

अंसारी की मौत के साथ ही अपराध के एक युग और राजनीति के साथ उसके गठजोड़ के एक अध्याय का अंत हो गया। मुख्तार अंसारी के खिलाफ हत्या से लेकर जबरन वसूली तक 65 मामले दर्ज थे, फिर भी उसे सपा समेत अलग-अलग राजनीतिक दलों से टिकट मिलता रहा। साल 1978 की शुरुआत में महज 15 साल की उम्र में अंसारी ने अपराध की दुनिया में कदम रखा।