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परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी का निधन, अधूरी रह गई यह इच्छा

देश में भारतीय सेना से जुड़े आयोजनों में भी उनको हमेशा बुलाया जाता रहा है।

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रसूलन बीबी

Rasulan bibi

गाजीपुर. 1965 की जंग में पाकिस्तानी पैटन टैंकों को तबाह करने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 96 साल की थीं और पिछले काफी समय से बीमार चल रही थीं। दुल्लहपुर थाना क्षेत्र के धामूपुर के मूल रूप से रहने वाले शहीद वीर अब्दुल हमीद को मरणोपरांत सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मनित किया गया था।

रसूलन बीबी ने दुल्लहपुर के अपने आवास में शुक्रवार दोपहर के करीब 1.15 बजे अंतिम सांस ली। सूचना के बाद उनके घर पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। वीर अब्दुल हमीद की पत्‍नी रसूलन बीबी अपने परिवार के साथ गाजीपुर में ही रह रही थीं। देश में भारतीय सेना से जुड़े आयोजनों में भी उनको हमेशा बुलाया जाता रहा है। शनिवार को रसूलन बीबी का अंतिम संस्कार धामूपुर में ही किया जायेगा।

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कौन थे वीर अब्दुल हमीद

देश पर मरने वाले वीर सपूतों का जब भी नाम लिया जाता है तो गाजीपुर के मरणोपरांत परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद का नाम बरबस ही होंठों पर आ जाता है। सेना में कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद का जन्म गाजीपुर के धामूपुर में 1933 में हुआ था। 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में उन्होंने दुश्मनों का खूब लोहा लिया था और फिर 1965 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग में अमेरिका निर्मित अजेय सात पैटेन टैंक को हथगोले से उड़ाने में शहीद हो गये। वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीवी ने बताया था कि सेना में भर्ती के बाद पहला युद्ध उन्होंने चीन से लड़ा और जंगल में भटक कर कई दिनों तक भूखे रहकर किसी तरह घर आये थे जहां पत्ता तक खाना पड़ा था।

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सम्मान की इच्छा लिये चलीं गयीं रसूलन बीबी

आज भी शहीद अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि पर उनके पैतृक गांव धामूपुर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन होता है और 2017 में खुद सैन्य प्रमुख जनरल विपिन रावत और तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक कार्यक्रम में धामूपुर पहुंचे थे और रसूलन बीबी को सम्मानित किया था, पर गाजीपुर जिला प्रशासन से सम्मानित होने की रसूलन बीबी की इच्छा अधूरी रह गयी। एक बार बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि गाजीपुर जिला प्रशासन उनको कभी भी 15 अगस्त पर जिला मुख्यालय नहीं बुलाता है न ही उनको कोई सम्मान दिया जाता है।

BY- ALOK TRIPATHI