
गाजीपुर जिले में कोरोना से अब तक 221 की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य वजहों से मरने वालों की तादात कहीं ज्यादा है
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गाजीपुर. Wood Bank in Ghazipur : कोरोना को दूसरी लहर में मृतकों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते श्मशान घाट में शवों को जलाने वाली लकड़ियों की भारी कमी हो गई है। नतीजन, लोग नदियों में शवों और अधजले शवों को प्रवाहित करने लगे। इससे जल प्रदूषण का खतरा बढ़ ही गया है, हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शवों का अंतिम संस्कार भी होना मुश्किल हो गया है। इसे देखते हुए समाजसेवियों की मदद से गाजीपुर के श्मशान घाट पर लकड़ी बैंक बनाया गया गया है, जहां से कोई भी जरूरतमंद शवों को जलाने के लिए नि:शुल्क लकड़ी ले सकता है।
गाजीपुर के प्रमुख समाजसेवी संजय राय शेरपुरिया ने श्मशान घाट पर लकड़ी बैंक का शुभारंभ किया। उन्होंने कहाकि लकड़ी की कमी से कोई शव गंगा में यूं ही न फेंक जाए, इसलिए गाजीपुर श्मशान घाट पर लकड़ी बैंक बनाया गया है। इसमें कोई भी व्यक्ति लकड़ी दान कर सकता है और जरूरतमंद यहां से नि:शुल्क लकड़ी लेकर शव का अंतिम संस्कार पूरे विधि और सम्मान के साथ कर सकेंगे।
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गंगा नदी में उतरा रहे शव
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गाजीपुर जिले में कोरोना से अब तक 221 की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य वजहों से मरने वालों की तादात कहीं ज्यादा है। ऐसे में श्मशान घाट पर लकड़ी की भारी कमी आ गई, जिसके चलते अधजली अवस्था में या फिर शवों को स्थानीय नदियों में जल प्रवाह किया जाने लगा। जिसके चलते शवों का गंगा नदी में उतराया दिखना आम बात हो गई। अगर गंगा में शवों के उतराने की बात की जाए तो तकरीबन 150 शव उतराए मिले हैं और अभी भी गंगा में शवों के उतराने का सिलसिला जारी है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए जिला प्रशासन ने शवों को जलप्रवाह न करने की अपील की है।
Published on:
15 May 2021 01:29 pm
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