
देवीपाटन मंडल की चार लोकसभा सीटों में तीन पर बीजेपी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। कैसरगंज लोकसभा सीट पर बृजभूषण सिंह के टिकट को लेकर सस्पेंस बरकरार है। यहां पर समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी ने भी इस सीट पर चुप्पी साध ली। ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी का टिकट क्लियर होने के बाद सपा और बसपा अपने टिकट का ऐलान करेगी।
उत्तर प्रदेश के कैसरगंज लोकसभा सीट पर बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह के टिकट को लेकर सस्पेंस बरकरार है। बीजेपी के साथ ही सपा और बसपा ने भी अपने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान नहीं किया है। राजनीति के विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी उम्मीदवार के नाम का ऐलान होने के बाद सपा और बसपा अपने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान करेगी। मीडिया के एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव का एक बयान सामने आया था जिसमें उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह टिकट मांगते हैं। तो हम उन्हें टिकट दे देंगे। कैसरगंज लोकसभा सीट में गोंडा जिले की तीन विधानसभा और बहराइच की दो विधानसभा सीट आती है। इनमें तरबगंज, कर्नलगंज, कटरा तथा बहराइच जिले की कैसरगंज और पयागपुर विधानसभा सीट आती है।
यूपी की सियासत में कैसरगंज लोकसभा सबसे चर्चित सीट
कैसरगंज लोकसभा सीट इस समय यूपी की सबसे चर्चित लोकसभा सीटों में से है। वर्ष 2019 के चुनाव में यहां से बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी चंद्रदेव राम को भारी मतों के अंतर से हराया था। बृजभूषण सिंह पर महिला पहलवानों ने पिछले वर्ष यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। जिसके कारण बृजभूषण सिंह के साथ ही यह लोकसभा सीट पूरे देश में चर्चित हो गई। लोकसभा चुनाव आते की यह लोकसभा सीट इस समय फिर एक बार सुर्खियों में आ गई। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस सीट को लेकर बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती है। यदि वह बृजभूषण सिंह को टिकट दे देती है। तो कहीं विपक्ष इसे मुद्दा ना बना ले। इसका असर सिर्फ कैसरगंज लोकसभा सीट पर ही नहीं बल्कि प्रदेश की कई सीटों पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ बृजभूषण सिंह का पूरे देवीपाटन मंडल सहित पूर्वांचल की कई सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव है। ऐसे में टिकट काटने के बाद पार्टी को कहीं बड़ा नुकसान ना उठाना पड़ जाए। इस बात पर भी मंथन चल रहा है। सपा और बसपा को भी बीजेपी के टिकट का इंतजार है। बीजेपी का टिकट फाइनल होने के बाद सपा और बसपा जातीय समीकरण को साधते हुए अपने प्रत्याशी की घोषणा कर सकती है। हालांकि 2019 के चुनाव पर नजर डालें तो सपा और बसपा के बीच गठबंधन था। इस सीट पर बृजभूषण सिंह ने बसपा उम्मीदवार चंद देवराम को 2.61 लाख के मतों से पराजित किया था। इस सीट पर बृजभूषण सिंह ने दो बार बीजेपी से तथा एक बार सपा के टिकट पर अपना परचम लहराया था।
कैसरगंज लोकसभा सीट पर एक नजर
वर्ष 1952 के चुनाव में हिंदू महासभा से शकुंतला नायर, वर्ष 1957 के चुनाव में कांग्रेस से भगवान दीन मिश्र, 1962 के चुनाव में स्वतंत्र पार्टी से बसंत कुमार, 1967 के चुनाव में भारतीय जनसंघ से शकुंतला नायर, 1971 के चुनाव में भारतीय जन संघ से शकुंतला नायर दोबारा चुनी गई। 1977 में जनता पार्टी से रुद्रसेन चौधरी, 1980 में कांग्रेस से राणा वीर सिंह, 1984 में कांग्रेस के टिकट पर राणा वीर सिंह ने दोबारा विजय हासिल की 1989 में बीजेपी से रुद्रसेन चौधरी, 1991 में बीजेपी से लक्ष्मी नारायण मणि त्रिपाठी 1996, 1998 1999 2004 में सपा के टिकट से बेनी प्रसाद वर्मा ने लगातार चार बार जीत हासिल किया। वर्ष 2009 में समाजवादी पार्टी से बृजभूषण सिंह वर्ष 2014 में बृजभूषण सिंह भाजपा से तथा वर्ष 2019 में बृजभूषण सिंह बीजेपी से रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज किया।
Updated on:
28 Mar 2024 07:16 pm
Published on:
28 Mar 2024 04:17 pm
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