
FIR
गोण्डा. देवीपाटन मंडल आयुक्त ने गोण्डा सदर में तैनात रहे चुके नायब तहसीलदार समेत 4 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। सदर में तैनात रह चुके नायब तहसीलदार रत्नेश तिवारी पर फर्जी तरीके से जमीन हड़पने में मदद करने का आरोप लगा है, नायब तहसीलदार ने फर्जी बैनामे दार काल्पनिक नाम उमा का नाम दर्ज कर 3.69 एकड़ जमीन हड़पने की साज़िश की है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कमिश्नर ने एन्टी भूमाफिया एक्ट के तहत मामला दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है, आरोपी नायब तहसीलदार वर्तमान समय में गोरखपुर में तैनात है।
आयुक्त एसवीएस रंगाराव ने कहा कि गोण्डा सदर तहसील के गिर्द गोण्डा गांव में 2014 का मामला है। उक्त समय सदर तहसील के नायब तहसीलदार 1962 में हुए फर्जी बैनामे के आधार पर नामांतरण आदेश जारी कर दिया था। बाद में संज्ञान में आने पर अपर आयुक्त से जांच करायी गई। जिसमें सारे तथ्य सामने आ गये है। जिसमें उक्त समय में बैनामा हुआ ही नहीं था। कूटरचित अभिलेखों के आधार पर दूसरे का नाम दर्ज करा दिया गया जो गलत है। जिसके सम्बन्ध में नायसब तहसीलदार, पेशकार और क्रेतागणों के विरुद्ध भू-माफिया एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। कुल भूमि 3.69 एकड़ थी।
एसवीएस रंगाराव आयुक्त देवीपाटन मंडल गोण्डा
फर्ज़ी तरीके से जमीन हड़पने के एक मामले पर हाईकोर्ट के आदेश पर जांच करते हुए देवीपाटन मंडल के कमिश्नर एसवीएस रंगगाराव ने पूर्व में गोण्डा सदर में तैनात नायब तहसीलदार रत्नेश तिवारी सहित चार लोगों पर एसडीएम को एन्टी भूमाफिया एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिये है। मामला गोण्डा गिर्द का है जहां एक फरियादी निकहत ने कोर्ट में अपील की थी कि बिना उसके जानकारी उसकी 3.69 एकड़ जमीन को फर्ज़ी तरीके एक महिला को बैनामेदार बना कर बेंच दिया गया था। इस फर्जीवाड़े की जांच के आदेश हाइकोर्ट ने कमिश्नर को दी थी, जांच के बाद पाया गया कि उस समय गोण्डा सदर में तैनात नायब तहसीलदार ने इस फर्ज़ीवाड़े में भूमाफियों की ज़मीन हड़पने में मदद की और अपने पद की गरिमा का दुरुपयोग किया।
अधिवक्ता सीपी सिंह ने बताया कि निकहत कादिर खां से बैनामा लिया था। जिससे उनका दाखिल खारिज हुआ लेकिन विपक्षी ने धोखाधड़ी करके काल्पनिक नाम उमा देवी के नाम से 45 साल पहले के बैनामा को कूटरचित कराके नायब तहसीलदार गोण्डा को मिलाकर दाखिल खारिज का आदेश कराकर उमा देवी का नाम खतौनी में दर्ज करा दिया। यह गोण्डा शहर की करोड़ों रुपये की भूमि है। जिसको लेकर उच्च न्यायालय में वाद दायर किया।
उच्च न्यायालय ने आयुक्त जांच कर निस्तारण करने का निर्देश दिया था। जिसके परिपेक्ष्य में कूटरचित अभिलेख का पोल खुल गया। जिससे आयुक्त ने पुनः निकहत के नाम से भूमि का दाखिल खारिज कराकर खतौनी में दर्ज करने का आदेश दिया और नायब तहसीलदार सहित चार लोगों को दोषी मानते हुए मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया।
Published on:
06 Jan 2018 01:41 pm
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