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Gonda: प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए खुलेगा बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर, किसानों को मिलेगी ये सुविधा

Gonda News: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर खोलने की तैयारी चल रही है। किसान यहां रसायन मुक्त खेती करने के गुरु सीखेंगे। बीआरसी केंद्र स्थापित करने के लिए उद्यमी किसान या एफपीओ को दो किस्तों में एक लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।

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Gonda

कृषि विभाग गोंडा

Gonda News: जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। तमाम किसान जैविक खेती कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले में एक बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर खोलने की तैयारी चल रही है। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही यहां पर जैविक खाद तैयार कर उसकी बिक्री की जाएगी। बीआरसी केंद्र खोलने के लिए जिला स्तरीय कमेटी बनाई जाएगी। जिसमें उद्यमी किसान या एफपीओ का चयन किया जाएगा। केंद्र स्थापित करने के लिए 1 लाख का अनुदान दो किस्तों में दिया जाएगा।

Gonda News: सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में बीआरसी केंद्र की स्थापना की जाएगी। यहां पर जैविक खेती करने के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सेंटर पर पशुधन आधारित उत्पादों की बिक्री होगी। जीवामृत,बीजामृत,नीमास्त्र जैसे उत्पादों के प्रयोग से किसानों की खेती लहलहाएगी। किसान रोगमुक्त सब्जी व अनाज उत्पादित कर सकेंगे।

गोंडा में करीब 5 लाख किसान करते खेती, जैविक उत्पादों की तरफ लोगों का बढ़ रहा रुझान

गोंडा जिले में करीब 5 लाख किसान खेती करते हैं। इसमें से अधिकांश किसान रासायनिक खाद का प्रयोग करते हैं। रासायनिक खाद के दुष्प्रभाव के कारण एक तरफ जहां मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। वहीं दूसरी तरफ उत्पादन भी घटता जा रहा है। लोगों का रुझान अब जैविक उत्पादों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। जैविक उत्पाद काफी महंगे रेट में भी बिक रहे हैं। गोंडा में कुछ किसान जैविक खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं। किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले में एक बीआरसी सेंटर खोले जाने की तैयारी चल रही है। इस केंद्र पर जैविक खाद व जैव कीटनाशक तैयार किया जाएगा।

बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित कर किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा बीआरसी केंद्र पर जैविक उत्पाद मसलन बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, आग्नेयास्त्र आदि जैविक उर्वरक व जैव कीटनाशकों की बिक्री होगी। इन उत्पादों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य बेहतर होगा, रसायनों का प्रयोग कम होगा, रसायनों से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।

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उपनिदेशक कृषि बोले-बीआरसी चयन के लिए शुरू होगी प्रक्रिया

उपनिदेशक कृषि प्रेम कुमार ठाकुर ने बताया कि जल्द ही बीआरसी चयन के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कृषि निदेशालय की तरफ से बीआरसी स्थापित करने का निर्देश मिला है। इसके लिए तैयारी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में किसने की लागत काम आती है जबकि मुनाफा बेहतर होता है बाजार में जैविक उत्पादों की तेजी से मांग बढ़ रही है। कुछ किसान जैविक खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।