
गोंडा में जमीन घोटाले के 58 मुकदमे दर्ज हैं ।
40 से अधिक मामलों की एसआईटी जांच कर रही है। जमीन घोटाले में करीब 8 लोग जेल जा चुके हैं। इस बार जमीन माफियाओं ने नवाबगंज गन्ना समिति की जमीन ही बेंच दी।
गन्ना समिति के अधिकारियों ने बताया कि वह कई सालों से जमीन दाखिल खारिज कराने की पैरवी कर रहे हैं। जमीन बैनामा होने के बाद जिला गन्ना अधिकारी ओपी सिंह और समिति के सचिव ने जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले से अवगत कराया है।
साल 1936 में पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह ने किया था उद्घाटन
देश की आजादी के पहले ही नवाबगंज चीनी मिल की स्थापना हुई थी। उस समय जिले में यह अकेली चीनी मिल थी। वर्ष 1936 में नवाबगंज गन्ना समिति की स्थापना हुई। देश की आजादी के बाद वर्ष 1953 में कांग्रेस सरकार के तत्कालीन कृषि मंत्री चौधरी चरण सिंह में इस गन्ना समिति का उद्घाटन किया था।
साल 1979 में वह देश के प्रधानमंत्री बने थे। उस समय जमीन का मालिकाना हक फैजाबाद के एक व्यवसायी का था। समिति के सचिव अवधेश सिंह बताते हैं उस समय व्यवसायी से समिति के पक्ष में जमीन का बैनामा हुआ था, लेकिन बैनामा होने के बाद जमीन का दाखिल खारिज नहीं हुआ।
दाखिल खारिज ना होने से समिति के नाम नहीं हुई जमीन
दाखिल खारिज ना होने के कारण वह जमीन अभिलेखों में समिति के नाम नहीं हुई। यह जमीन फैजाबाद के व्यवसायी रूपेश कुमार अग्रवाल और राजीव नारायण के नाम दर्ज रही है। इसी जमीन में समिति का भवन भी बना है।
19 जनवरी को गन्ना समिति की जमीन हुई बैनामा
19 जनवरी 2023 को यह जमीन रूपेश कुमार अग्रवाल ने 3 लोगों के नाम बैनामा कर दिया। इसकी सूचना मिलते ही समिति के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। इस पूरे मामले को समिति के अधिकारियों ने डीएम और एसपी को अवगत कराया। पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने एंटी करप्शन टीम को जमीन की जांच सौंपी है।
86 बरस बाद समिति ने दिखाई तेजी एडीएम न्यायालय किया मुकदमा
गन्ना समिति के नाम जमीन बैनामा होने के बाद दाखिल खारिज ना होना। समिति और तहसील प्रशासन की लापरवाही मानी जा रही है। अब 86 वर्ष बाद मामले में नया पेच आने के बाद समिति की तरफ से एसडीएम न्यायालय में दाखिल खारिज करने के लिए मुकदमा दाखिल किया गया है।
Published on:
27 Jan 2023 08:17 pm
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