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एनसीआरपी पोर्टल पर 43 शिकायतें, 3.20 करोड़ फ्रीज; गोंडा में 21 करोड़ के म्यूल अकाउंट का खुलासा

Cyber Vajra Operation: गोंडा पुलिस ने साइबर वज्र अभियान के तहत म्यूल अकाउंट संचालित करने वाले बड़े साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया। पांच आरोपी गिरफ्तार हुए। जांच में 20 से अधिक खातों में 21 करोड़ रुपये के लेन-देन का खुलासा हुआ। एनसीआरपी पर 11 राज्यों से 43 शिकायतें दर्ज हैं। इसमें 3.20 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए हैं।
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पकड़े गए आरोपी प्रेस वार्ता करते एसपी फोटो सोर्स पुलिस मीडिया सेल

पकड़े गए आरोपी प्रेस वार्ता करते एसपी फोटो सोर्स पुलिस मीडिया सेल

Cyber Vajra Operation: गोंडा पुलिस ने प्रदेशव्यापी 'साइबर वज्र' अभियान के तहत एक ऐसे साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। जो बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इन्हीं खातों का इस्तेमाल देशभर में हुई साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किया जाता था। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी संख्या में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रदेशव्यापी साइबर वज्र अभियान के तहत गोंडा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर ऐसे संगठित साइबर गिरोह का खुलासा किया है। जो लोगों को नौकरी का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। और बाद में उन्हीं खातों का इस्तेमाल देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए करता था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपक गोयल, विजय सोनी, देवनारायण मिश्रा, गंगोत्री पांडेय और शहबान आलम उर्फ सोनू के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से छह मोबाइल फोन, 15 आधार कार्ड, 10 सिम कार्ड, आठ मोहर, दो पैन कार्ड, दो डेबिट कार्ड, एक मेमोरी कार्ड, एक मोटरसाइकिल और एक स्कूटी बरामद की है।

नौकरी दिलाने का झांसा

पूरे मामले की शुरुआत कोतवाली देहात क्षेत्र के रहने वाले एक युवक की शिकायत से हुई। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसे सोलर कंपनी में 15 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। इसी बहाने उसके नाम पर बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया गया। आरोप है कि खाते में उसका मोबाइल नंबर दर्ज कराने के बजाय किसी दूसरे नंबर को लिंक कर दिया गया। इंटरनेट बैंकिंग की पूरी जानकारी आरोपियों ने अपने पास रख ली।

विभिन्न बैंक खातों में भेजते थे धनराशि

जांच में सामने आया कि पीड़ित के नाम पर फर्जी उद्यम और जीएसटी पंजीकरण भी कराया गया। इसके बाद उसी खाते के जरिए करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया गया। और रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि आरोपी बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनके नाम पर बैंक खाते तैयार कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉर्शन जैसे अपराधों से प्राप्त रकम को छिपाने और आगे भेजने के लिए म्यूल अकाउंट के रूप में किया जाता था। बदले में गिरोह को आर्थिक लाभ मिलता था।

एनसीआरपी पोर्टल पर 3.20 करोड़ रुपये फ्रीज

पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने बताया कि बरामद दस्तावेजों की जांच में अब तक 20 से अधिक ऐसे म्यूल अकाउंट मिले हैं। जिनमें करीब 21 करोड़ रुपये का लेन-देन होने की जानकारी सामने आई है। इन खातों से जुड़े मामलों में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, लद्दाख, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, कर्नाटक और तेलंगाना समेत 11 राज्यों से अब तक 43 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। जांच के दौरान लगभग 3.20 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में होल्ड (फ्रीज) कराए जा चुके हैं। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

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