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गोंडा: मछली बरसा रही लक्ष्मी, जल संरक्षण का मकसद भी पूरा, ग्राउंड वाटर लेवल बढ़ा,एक हेक्टेयर मत्स्य बीज उत्पादन कर कमा रहे 30 लाख

गोंडा किसान अब परंपरागत धान गेहूं की खेती छोड़ मत्स्य पालन की तरफ उन्मुख हो रहे हैं। जनपद में तेजी से बढ़ रहे मत्स्य पालन के क्षेत्रफल से एक तरफ जहां जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है। वही मछली किसानों के घर में लक्ष्मी की बरसात करा रही है।

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जिले के झंझरी विकासखंड स्थित मत्स्य परिक्षेत्र पूरे तिवारी स्थित मत्स्य पालक एजेंसी को इस बार शासन द्वारा 41 लाख मत्स्य बीज देने का लक्ष्य रखा गया है। किसान यहां से विभिन्न प्रकार के मत्स्य बीज ले सकते हैं। कटरा विकास खंड के गांव कोड़हा जगदीशपुर निवासी फरीद खान ने बताया कि पहले खेती करते थे। लेकिन मत्स्य पालन में बेहतर मुनाफा होने के कारण खेती छोड़ अब वह मत्स्य पालन का काम कर रहे हैं शुरुआती दौर में उन्होंने करीब 4 बीघे में निजी भूमि पर तालाब बनवाकर मत्स्य पालन का काम शुरू किया था। बीते वर्षों में मुझे 50 बीघे का सरकारी तालाब पट्टे पर मिल गया था। करीब 5 वर्षों से हम मत्स्य पालन का काम कर रहे हैं। बरसात ना होने के कारण इस बार पूरी तरह से सूखा पड़ गया है। इस बार थोड़ा परेशानी हो रही है। फिर भी मत्स्य पालन बेहतर मुनाफे का सौदा है।

एक हेक्टेयर में मिल जाता 25 से 30 लाख

कटरा बाजार के सर्वांगपुर निवासी किसान गुलशन कुमार ने बताया कि 2017 से मत्स्य पालन कर रहा हूं। शुरुआती दौर में एक छोटे से तालाब से मत्स्य पालन का काम शुरू किया था। वर्तमान समय में मेरे पास 34 हेक्टेयर तालाब है। हम मत्स्य बीज का एक हेक्टर में उत्पादन करते हैं। जिसका निजी तथा सरकारी विभाग में सप्लाई देते हैं। यह पूरे सीजन सुचारू रूप से चल जाए तो 25 लाख रुपए से लेकर 30 लाख तक का फायदा हो सकता है। कहां की किसान मत्स्य पालन कर एक तरफ जहां जल संरक्षण की मुहिम को धार दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मालामाल हो रहे हैं।

गोंडा में तेजी से बढ़ रहा मत्स्य पालन का क्षेत्रफल

मत्स्य निरीक्षक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि मत्स्य परिक्षेत्र पूरे तिवारी से किसानों को हम मत्स्य बीज उपलब्ध कराते हैं। इस बार शासन द्वारा 41 लाख मत्स्य बीज सप्लाई करने का लक्ष्य मिला है। उसे पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोंडा में मत्स्य पालन का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ रहा है। 2 दर्जन से अधिक किसानों ने करीब 70 हेक्टेयर में निजी भूमि पर तालाब बना कर मत्स्य पालन का काम शुरू किया है। वही इस वर्ष 545 हेक्टेयर नए तालाबों का पट्टा दिया गया है। कहा कि इस बार बरसात ना होने से किसानों के तालाब सूख रहे हैं। ऐसे में इस बार थोड़ी बहुत समस्या आ रही है। बारिश ना होने के कारण मत्स्य बीज की सप्लाई वर्तमान समय में कम हो रही है।

डिवाइस बताएगी तालाब में ऑक्सीजन की लेवल, ऑक्सीजन कम होने पर होगी कृतिम बरसात

मत्स्य पालन के क्षेत्र में तमाम नई नई तकनीक आई है। जिससे किसान बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। कहां की कभी-कभी तालाब में ऑक्सीजन की कमी के कारण तमाम मछलियां एक साथ मर जाती हैं। इसके निदान के लिए एक ऐसी डिवाइस बनाई गई है। जो पूरा सिस्टम तालाब पर फिट कर दिया जाएगा। यह ऑक्सीजन की लेबल बताता रहेगा। इसके साथ साथ तालाब पर स्प्रिंकलर सिस्टम भी लगा रहेगा। यह डिवाइस आपके मोबाइल से भी कनेक्ट रहेगी जो तालाब में ऑक्सीजन की कमी की सूचना देगी। जैसे ही तालाब में ऑक्सीजन की लेबल घटेगी। वैसे ही स्प्रिंकलर सेट तालाब में ऑटोमेटिक कृतिम बरसात कर देगा। जिससे ऑक्सीजन की कमी पूरी हो जाएगी।