सरयू नहर बनाने के लिए किसानों को बिना बताए वर्ष 2011 में इन किसानों की जमीन का अधिग्रहण करके जिलाधिकारी ने 73 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये पुनर्वास देने का नोटिस जारी किया। किसानों ने नोटिस लेने से मना कर दिया। उसके बाद विवाद शुरू हो गया। 3 वर्ष पहले जब नहर विभाग के अधिकारी माइनर को खोदने पहुंचे तब से आज तक किसान लगातार धरना दे रहे थे।
गोंडा जिले के कर्नलगंज तहसील के गांव परसा गोडरी में करीब 600 मीटर नहर खुदाई प्रभावित हो रही थी। वर्ष 2011 में इन किसानों की जमीन का अधिग्रहण करके जिलाधिकारी ने 73 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये पुनर्वास देने का नोटिस जारी किया। किसानों को बिना बताए जमीन अधिग्रहण के विरोध में नोटिस लेने से इंकार कर दिया। 2011 से किसानों का 83 हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से जिलाधिकारी के खाते में एफडी के रूप में जमा है। नहर के माइनर की खुदाई को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच कई राउंड की वार्ता विफल हो चुकी थी।
किसान कमलेश कुमार शुक्ला ने बताया नहर विभाग से हमारा मामला चल रहा था। 5 नवंबर सन 2020 से हम लोग अपनी मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। हम लोगों की प्रशासन से कई बार वार्ता हुई। लेकिन वह विफल हो गई। कमलेश ने बताया कि आज हमारी डीएम साहब से वार्ता हुई उन्होंने कहा कि हम जमीन के बदले आप को जमीन दे रहे हैं। जितनी जमीन गई है। उससे ज्यादा जमीन आपको मिल जाएगी 3 परिवार को गेटमैन की नौकरी भी दी जाएगी। जब हमने रोका तब डीएम साहब ने कहा कि हमने अधिकारियों को दे दिया है। वह आपका काम कर देंगे। अगर मामला टल जा रहा है। तो आगे हमें फोर्स लाने और ले जाने में गाइडलाइन बनाने में दिक्कत पड़ेगी। क्योंकि आगे त्यौहार पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में 12 किसान हैं। और करीब उनके डेढ़ सौ परिवार हैं। मेरे 6 बीघा खेत में बीचो-बीच से नहर जा रही है। जिससे खेत दोनों तरफ फट रहा है। कहा कि प्रशासन से मेरा समझौता हो गया है। वही एक दूसरे किसान बृजेश शुक्ला ने बताया मुझे मौखिक आश्वासन मिला है। जमीन देने के लिए जब हमें जमीन मिल जाएगी। तब हम संतुष्ट हो जाएंगे। धरना खत्म होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम प्रशासन से लड़ नहीं सकते हैं। मुझे न्याय मिल जाए। लेकिन अभी न्याय के लिए सिर्फ आश्वासन मिला है।