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Gonda News :राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने महानिदेशक को पत्र के माध्यम से दिया अल्टीमेटम, जानिए पूरा मामला

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का आरोप है कि कई बार ज्ञापन के माध्यम से समस्याओं के निराकरण के लिए अधिकारियों के माध्यम से पत्र शासन को दिया गया। संबंधित प्रकरण का निस्तारण ना होने के कारण शैक्षिक महासंघ ने स्कूली महानिदेशक को पत्र देकर बड़ा अल्टीमेटम दिया है। आइए जानते हैं कि शैक्षिक महासंघ की मांग क्या है।

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यूपी राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्राथमिक संवर्ग ने विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर महानिदेशक स्कूली शिक्षा को समय-समय पर ज्ञापन दिया गया। संबंधित प्रकरण का निस्तारण ना होने पर संगठन के महामंत्री ने पत्र देकर निर्धारित समय में निराकरण ना होने पर आंदोलन की चेतावनी दिया है।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरण आनंद को पत्र देकर शिक्षकों के अंतर्जनपदीय एवं जनपद के अंदर स्थानांतरण की पारदर्शी और स्थाई नीति लागू किए जाने सहित 25 सूत्री मांग पत्र सौंपा है।

केंद्र सरकार की तरह यूपी सरकार भी जारी करें मेमोरेंडम

केंद्र सरकार के पेंशन मेमोरेंडम की भांति उत्तर प्रदेश सरकार भी मेमोरेंडम जारी करें। परिषदीय विद्यालयों में छापामार पद्धति से निरीक्षण के नाम पर शिक्षकों का उत्पीड़न बंद किया जाए। पत्र में कहा गया है कि मंत्री ने परिषदीय शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा दिए जाने के निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देश को दरकिनार करते हुए। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने सशुल्क चिकित्सा बीमा का आदेश निर्गत किया है। जिसे निरस्त किया जाए।

शैक्षिक महासंघ की चेतावनी 27 तक निराकरण ना हुआ तो होगा व्यापक आंदोलन

बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की लंबित मांगों के निस्तारण के संबंध में 14 सूत्री मांगपत्र, बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में वीडियो कॉल/वॉयस कॉल के माध्यम से ऑनलाइन निरीक्षण आदेश को रद्द करने के सम्बन्ध में ज्ञापन प्रमुख रूप से हैं। इन ज्ञापनों के साथ-साथ विभिन्न समयों पर एकाकी शिक्षक समस्या विशेष दिये गये ज्ञापनो पर ना तो कोई कार्यवाही की गई और ना ही संगठन को औपचारिक रूप से ही अवगत कराया गया। इन समस्याओं का निस्तारण न करने से प्रदेश के शिक्षकों में व्यापक आक्रोश है।

संगठन के प्रदेशीय महामंत्री भगवती सिंह ने पत्र जारी कर चेतावनी दी है। 27 मई तक इन ज्ञापनों पर प्रभावी कार्यवाही ना करने या कार्यवाही के सम्बन्ध में औपचारिक रूप से सूचित ना करने पर संगठन धरना-प्रदर्शन के लिए विवश होगा। यह जानकारी प्रदेश प्रवक्ता वीरेंद्र मिश्र ने दी है।