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Gonda News : कबाड़ के जुगाड़ से बनाई देश की इकलौती पालीसर मशीन, पेटेंट कराने के लिए किया आवेदन, देखें वीडियो

एक युवक ने कबाड़ के जुगाड़ से एक ऐसी मशीन तैयार कर सबको चौंका दिया है। चलती फिरती यह मशीन डीजल बचत के साथ बाजार की अन्य मशीनों से काफी सस्ती है। युवक ने इसे पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया है।  

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गोंडा के युवक ने कबाड़ के जुगाड़ से एक ऐसी चलती फिरती धान कुटाई की मशीन तैयार किया है। यह देश की इकलौती पालीसर मशीन है। मशीन को पेटेंट कराने के लिए उसने आवेदन किया है।

गोंडा जिले के कर्नलगंज तहसील के पसका निवासी राजकुमार मिश्रा महज कक्षा 10 पास है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण पढ़ाई नहीं कर सके। शुरुआती दौर से ही रोजी-रोटी के लिए आटा चक्की तेल और धान मशीन मरम्मत का कार्य करते थे। राजकुमार बताते हैं कि एक दिन उनके मन में पालीसर बनाने का आइडिया आया। फिर उन्होंने कबाड़ से एक पुरानी मार्शल गाड़ी खरीदा। उसके बॉडी को उतारकर उस पर कबाड़ से अलग-अलग पार्ट खरीद कर पालीसर मशीन बैठा दिया।

बाजार में 10 लाख की मिलने वाली मशीन ढाई लाख में तैयार किया

युवक ने दस लाख में मिलने वाली पालेसर मशीन को कबाड़ से जुगाड़ से ढाई लाख में तैयार किया है। जिसमे कम लागत से अधिक धान की कुटाई की जा सकती है। सर्विसिंग में भी कम पैसा लगता है। आसानी से गांव गांव पहुच भी जाती है। अब परिवार के लिये रोजी रोटी का साधन बना हुआ है। मशीन पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया है। यह भारत की कबाड़ से जुगाड़ की पहली मशीन है। राजकुमार बताते हैं कि उन्हें पालेसर मशीन खरीदनी थी। जिसकी कीमत दस लाख थी। इतना पैसा उसके पास नहीं था। उसके दिमाग में यह बात आया, कि क्यों ना हम जुगाड़ से कबाड़ का पालेसर मशीन तैयार कर ले। उसने वही किया। एक पुरानी मार्शल गाड़ी खरीद लिया। जिसका मशीन और चक्के (पहिया) को अलग करके कबाड़ और जुगाड़ से पालेसर मशीन तैयार किया। जिसकी कुल लागत ढाई लाख रुपये आया है। राजकुमार ने बताया मैंने पता किया। इस तरह की पालेश्वर मशीन पूरे भारत में नहीं है। हमने इसे पेटेंट करने के लिए आवेदन किया है। राजकुमार की माने तो एक सप्ताह में मशीन पेटेंट हो जाएगी। राजकुमार का कहना है कि बाजार में यह मशीन 3 लाख के आसपास है। जबकि इसको चलाने के लिए 7 लाख रुपए का ट्रैक्टर भी खरीदना पड़ता है।

3 से 4 लीटर डीजल में होती 11 कुंटल धान की कुटाई

बाजार में बिकने वाली पालेश्वर मशीन की अपेक्षा कम लागत लगती है। बाजार की पालेसर मशीन में 6 से 7 लीटर डीजल में 8 से 10 कुंतल धान की कुटाई होती है। जबकि हमारे पालेसर मशीन में 3 से 4 लीटर में 10 से 11 कुंतल धान से चावल तैयार होता है। उसने बताया कि बाजार के पालेसर मशीन के सर्विसिंग में 25 से 30 हजार रुपये लगता है। जबकि हमारे पालेसर मशीन के सर्विसिंग में 10 से 15 हजार में हो जाता है।