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Gonda News : अंग्रेज नहीं बिछा पाए रेल लाइन, भाग खड़े हुए, बेहद खास मां खैरा भवानी की महिमा का इतिहास

एक ऐसा देवी मंदिर जहां मां की महिमा का इतिहास बेहद खास है। इस जंगल क्षेत्र से अंग्रेज रेल लाइन बिछा रहे थे। अचानक कुछ ऐसा हुआ कि अंग्रेज भाग खड़े हुए। और उन्हें रेलवे लाइन दूसरी तरफ बिछाना पड़ा।

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मां खैरा भवानी मंदिर

मां खैरा भवानी ज्योति के रूप में प्रकट हुई थी। इस मंदिर का सदियों पुराना अपना एक इतिहास है। अंग्रेज इस जंगल के रास्ते से रेल लाइन बिछा रहे थे। उनके सारे प्रयास फेल हो गए। उन्हें सिर्फ भागना ही नहीं बल्कि दूसरी दिशा में रेल लाइन बिछाना पड़ा।

गोंडा शहर के खैरा गांव में स्थित मां खैरा भवानी मंदिर लाखों भक्तों के आस्था का केंद्र है।‌ मां खैरा भवानी यहां ज्योति रूप में प्रकट हुई थी। मां के इस ज्योति पुंज को देखकर यहां रेल लाइन बिछाने का काम कर रहे अंग्रेज भाग खड़े हुए थे। इस प्राचीन मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर कृत्रिम आंख चढ़ाने से माता अपने भक्तों की आंखों की बीमारियों को दूर करती है।

खैरा भवानी मंदिर के प्रति मान्यता है कि यहां पर सच्चे दिल से मांगी गई मुराद अवश्य पूरी होती है। नवरात्र में यहां पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। हर कोई मां के जयकारे लगाता नजर आता है।‌जहां मंदिर स्थित है, वहां पहले जंगल हुआ करता था। अंग्रेजों के जमाने में यहां रेलवे लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ था। बताया जाता है कि इसी स्थान पर प्रकाश पुंज के रूप में आदिशक्ति दिखाई पड़ी थीं। जिसे देखकर अंग्रेज भाग खड़े हुए थे।

मां खैरा भवानी मंदिर स्थित पोखरा IMAGE CREDIT: Patrika original

जब भाग खड़े हुए अंग्रेज

दरअसल, मंदिर के पास से होते हुए अंग्रेज सरकार बलरामपुर के लिए रेलवे लाइन बिछाना चाह रही थी। इसके लिए जैसे ही काम शुरू किया गया। वैसे ही एक विशाल प्रकाश पुंज प्रकट हो गया। अंग्रेज इस अलौकिक चमत्कार को देखकर भाग खड़े हुए।

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मंदिर में भक्ति की अद्भुत छटा बिखरी दिखाई देती

मंदिर में जाने के लिए एक ही दरवाजा है। इसी से सभी भक्त मंदिर के भीतर प्रवेश करते हैं। यहां पर मां की ज्योति के साथ भीतर कई अन्य देवी देवताओं के मंदिर भी है। देवी के विभिन्न स्वरूपों की प्रतिमाएं मंदिर के भीतर विराजमान हैं। भगवान शंकर, हनुमान, काल भैरव के अलावा अन्य देवी देवताओं की पूजा एक साथ ही होती है। इससे मंदिर में भक्ति की अद्भुत छटा बिखरी दिखाई देती है।

मंदिर की पोखरी में सात कुआं कभी नहीं सूखता पानी

मंदिर के बगल में एक पोखरा है जिसमें हमेशा पानी भरा रहता है। कहा जाता है कि पानी निकलने के लिए इसमें सात कुंए मौजूद हैं। मंदिर में प्रवेश करने से पहले लोगों को पोखरे के पानी से आचमन करना होता है। मंदिर के पुजारी का कहना है कि देवी ज्योति के रूप में प्रकट हुई थी। यहां पर नवरात्र के अलावा भी हर समय मेले जैसा माहौल रहता है। नवरात्र के अवसर पर होने वाली भीड़ को देखते हुए यहां पर सुरक्षा व अन्य विशेष प्रबंध किए गए हैं। इससे आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।