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International yoga day : शेषनाग अवतार थे, योग के जनक महर्षि पतंजलि, जानिए क्यों सर्पाकार कोडर झील का आकार

International yoga day :योग एक ऐसी विधा है। जिसका अभी तक धार्मिक आधार पर कोई बटवारा नहीं है। लगभग सभी जाति धर्म के लोग इसका हिस्सा बन चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवाहन के बाद लोगों में इसका तेजी से असर हुआ है। महर्षि पतंजलि को नाग से बालक के रूप में प्रकट होने पर शेषनाग का अवतार भी माना जाता है।

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महर्षि पतंजलि

दुनिया को सबसे पहले योग का दर्शन कराने वाले महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली का पर्यटन विकास नहीं हो सका। जिनकी विधा का आज पूरी दुनिया में डंका बज रहा। उनकी जन्मस्थली सैकड़ों वर्ष उपेक्षा का शिकार रही है। योग का कोई धार्मिक आधार पर बटवारा नहीं है। सभी जाति धर्म के लोग योग को अपनाने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद भारत की योग के मामले में विश्व गुरु बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पूरी दुनिया में आज योग दिवस मनाया जा रहा है। लोग अपने घरों में योग कर रहे हैं। जगह जगह पर योग के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। जहां पर लोगों का सुबह से पहुंचना शुरू हो गया है। अभी हाल में योगी सरकार ने महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली के पर्यटन विकास के लिए 4.64 करोड़ रुपए दिए है। इस धनराशि से पेयजल परिसर का विकास सहित तमाम काम कराए जाएंगे। पर्यटकों को रुकने के लिए धर्मशाला का भी निर्माण कराया जाएगा।

महर्षि पतंजलि अपने शिष्यों को पर्दे के पीछे से देते थे शिक्षा

गोंडा जिले के वजीरगंज कस्बा स्थित कोडर झील के पास महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली है । मान्यता है कि योग के जनक महर्षि पतंजलि पर्दे के पीछे से यहां पर अपने शिष्यों को शिक्षा देते थे। पतंजलि जन्मभूमि न्यास के संस्थापक डॉ स्वामी भागवताचार्य ने बताया कि वह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र संघ के अध्यक्ष सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर महर्षि पतंजलि के जन्मस्थली का पर्यटन विकास और अंतरराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय खोलने की मांग उठाई थी । उनके पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा गंभीरता से लेते हुए आयुष मंत्रालय को अंतरराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय का मसौदा तैयार करने के लिए कहां गया था । बाद में मंत्रालय ने उन्हें पत्र भेजकर यह कहकर मामले को टाल दिया की उनके यहां विश्वविद्यालय खोलने का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन योगी सरकार ने पतंजलि जन्मभूमि पर्यटन विकास के लिए 4.64 करोड़ रुपए दिए है।

योग स्वरूपी अमृतधारा को पूरे विश्व पर बरसाने वाले ऋषि पतंजलि शेषनाग के थे अवतार

इस समय पूरी दुनिया ने योग के महत्व को स्वीकार किया है। वहीं योग को पूरे समग्र विश्व में विख्यात करने वाले महर्षि पतंजलि की जन्म भूमि का अभी तक समुचित विकास नहीं हो सका। यहां तक दूरदराज से आए पर्यटकों को टूटी-फूटी सड़कों से गुजारना पड़ता है।

बोर्ड के साथ खड़े पतंजलि जन्मभूमि न्यास के संस्थापक स्वामी भगवताचार्य IMAGE CREDIT: Patrika original

कैसे हुआ जन्म

ऋषि पतंजलि की माता का नाम गोणिका था। इनके पिता के विषय में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। पतंजलि के जन्म के विषय में ऐसा कहा जाता है कि यह स्वयं अपनी माता के अंजुली के जल के सहारे धरती पर नाग से बालक के रूप में प्रकट हुए थे। माता गोणिका के अंजुली से पतन होने के कारण उन्होंने इनका नाम पतंजलि रखा। ऋषि को नाग से बालक होने के कारण शेषनाग का अवतार माना जाता है।

गोण्डा के कोडर गांव में जन्मे थे योग के जनक

महर्षि पतंजलि सिर्फ सनातन धर्म ही नहीं आज हर धर्मो के लिए पूज्य हैं। जिनके बताए योग के सूत्र से आज कितने लोगों ने असाध्य रोगों से मुक्ति पा ली है। जिस अमृत को देवताओं ने अपने पास सम्भाल के रखा उस अमृत स्वरूपी योग को पूरी दुनिया में बांटने वाले महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली जनपद के वजीरगंज विकासखंड के कोडर गांव में स्थित है। महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली का साक्ष्य धर्मग्रंथों में भी मौजूद है। इस बात का प्रमाण पाणिनि की अष्टाध्यायी महाभाष्य में मिलता है। जिसमें पतंजलि को गोनर्दीय कहा गया है। जिसका अर्थ है गोनर्द का रहने वाला। और गोण्डा जिला गोनर्द का ही अपभ्रंश है। महर्षि पतंजलि का जन्मकाल शुंगवंश के शासनकाल का माना जाता है। जो ईसा से 200 वर्ष पूर्व था। महर्षि पतंजलि योगसूत्र के रचनाकार है। इसी रचना से विश्व को योग के महत्व की जानकारियां प्राप्त हुई। ये महर्षि पाणीनी के शिष्य थे।

महर्षि पतंजलि के जन्मस्थली पर लगा बोर्ड IMAGE CREDIT: Patrika original

क्यों सर्पाकार कोडर झील का आकार

महर्षि पतंजलि अपने आश्रम पर अपने शिष्यों को पर्दे के पीछे से शिक्षा दे रहे थे। किसी ने ऋषि का मुख नहीं देखा था। लेकिन एक शिष्य ने पर्दा हटा कर उन्हें देखना चाहा तो वह सर्पाकार रूप में गायब हो गये। लोगों का मत है की वह कोडर झील होते हुए विलुप्त हुए। यही कारण है कि आज भी झील का आकार सर्पाकार है। योग विद्या जिसको आज अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति मिल चुकी है। फिर भी योग के प्रेरणा स्त्रोत पतंजलि की जन्मस्थली गुमनाम है।

महर्षि पतंजलि के तीन प्रमुख कार्य

महर्षि पतंजलि अपने तीन प्रमुख कार्यो के लिए आज भी विख्यात हैं। व्याकरण की पुस्तक महाभाष्य, पाणिनि अष्टाध्यायी व योगशास्त्र कहा जाता है कि महर्षि पतंजलि ने महाभाष्य की रचना का काशी में नागकुआँ नामक स्थान पर इस ग्रंथ की रचना की थी। आज भी नागपंचमी के दिन इस कुंए के पास अनेक विद्वान और विद्यार्थी एकत्र होकर संस्कृत व्याकरण के संबंध में शास्त्रार्थ करते हैं। महाभाष्य व्याकरण का ग्रंथ है। परंतु इसमें साहित्य धर्म भूगोल समाज रहन सहन से संबंधित तथ्य मिलते है। बताया जाता है सवा दो बीघा जमीन मंदिर के नाम पर है। इस पर भी कई जगहों पर अतिक्रमण है। यहाँ के पुजारी रमेश दास इस मंदिर की देख रेख व पूजा पाठ करते हैं। पतंजलि जन्मभूमि न्यास के संस्थापक इस स्थली को जागृत रखने के लिए वह प्रति वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इस स्थल पर विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन करते है। ताकि महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि हमारी युवा पीढ़ी भूल न जाये।